
नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र बुधवार से शुरू हो रहा है। सत्र की शुरुआत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से होगी, जिसके बाद केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा।
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने रखी मांग
मंगलवार को हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने बजट सत्र के दौरान ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा की मांग की। सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया। विपक्षी नेताओं ने सत्र के लिए सरकारी कामकाज का एजेंडा समय पर साझा न किए जाने पर भी आपत्ति जताई।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रीजीजू ने कहा कि सरकारी कामकाज की सूची आमतौर पर राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद साझा की जाती है और इसे उचित समय पर सदन में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्षी द्वारा उठाए गए मुद्दे राष्ट्रपति के अभिभाषण और बजट चर्चा के दौरान उठाए जा सकते हैं।
सरकार ने विपक्ष की मांगों का जवाब दिया
विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम पर चर्चा के सवाल पर सरकार ने कहा कि एक बार कानून देश के सामने आने के बाद उसका पालन करना अनिवार्य है। कोई रिवर्स गियर में वापस नहीं जा सकता। रीजीजू ने यह भी कहा कि यह सत्र साल का पहला सत्र है और सदन को सुचारु रूप से चलाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
विपक्ष का रुख और प्रमुख मुद्दे
कांग्रेस ने बैठक के बाद कहा कि बजट सत्र में वह विदेश नीति, अमेरिकी टैरिफ, रुपये में गिरावट, मनरेगा और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार आखिरी समय में बिना पूर्व सूचना के बिल पेश कर विपक्ष को चर्चा से वंचित कर रही है।
सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली में सस्पेंस और स्टन की रणनीति देखी जा रही है। क्षेत्रीय दलों ने भी अपने मुद्दे मजबूती से रखे। बीजू जनता दल (बीजेडी) ने ओडिशा के किसानों की समस्याओं और फसल बीमा में देरी का मुद्दा उठाया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आई-पैक पर हुई छापेमारी का हवाला देते हुए केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
संसद का यह बजट सत्र देश की वित्तीय और राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें विपक्ष और क्षेत्रीय दलों के मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा होगी।