
महाराष्ट्र: भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का ज्वलंत उदाहरण हैं लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के। किसान परिवार से आने वाली सीता ने अपने साहस और काबिलियत से सेना में न सिर्फ पहचान बनाई, बल्कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हासिल की।
साल 2024 में केरल के वायनाड में भारी बारिश और भूस्खलन के दौरान, लेफ्टिनेंट कर्नल सीता ने 2,300 से अधिक कर्मियों को प्रशिक्षित करते हुए राहत और बचाव ऑपरेशंस का नेतृत्व किया। उन्होंने सिर्फ 31 घंटों में 190 फुट लंबे बेली ब्रिज का निर्माण कर दूरदराज के गांवों को जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता बहाल किया। इसके पहले 2015 में भी उन्होंने जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर सेना की तैनाती के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राष्ट्रीय पहचान
भारत सरकार ने सीता अशोक शेल्के को सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2026 के लिए चुना। यह पुरस्कार हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर आपदा प्रतिक्रिया और मानवीय राहत में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिकारियों को दिया जाता है।
किसान परिवार और प्रारंभिक प्रेरणा
सीता महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता अशोक भीकाजी शेल्के किसान हैं, जबकि उनकी माता गृहणी हैं। 10वीं कक्षा में उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सेना में जाना है। शुरू में आईपीएस बनने का सपना था, लेकिन अखबार में पढ़े एक महिला अधिकारी के आर्टिकल ने उन्हें सेना की ओर मोड़ा।
शिक्षा और प्रशिक्षण
सीता ने प्रवारा ग्रामीण इंजीनियरिंग कॉलेज, अहमदनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। IIT या NIT नहीं, बल्कि टीयर-3 कॉलेज से पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल किया। SSB इंटरव्यू में वे दो बार असफल रहीं, लेकिन तीसरे प्रयास में सफल होकर OTA, चेन्नई में प्रशिक्षण लेकर भारतीय सेना में अधिकारी बनीं।
प्रेरणा:
सीता का उदाहरण यह दिखाता है कि मेहनत, साहस और दृढ़ संकल्प से किसी भी लड़की का सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “मैं खुद को सिर्फ एक महिला नहीं मानती, मैं एक सैनिक हूं।”