
मुजफ्फरपुर: वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही मुजफ्फरपुर जिले के दो प्रतिष्ठित व्यक्तित्व, डॉ. गोपालजी त्रिवेदी और डॉ. श्याम सुंदर मखरिया, राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेरते हुए पद्मश्री सम्मान से सम्मानित हुए। दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वान हैं।
डॉ. गोपालजी त्रिवेदी: कृषि विज्ञान में योगदान
मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड के मतलुपुर गांव से निकलकर राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले डॉ. त्रिवेदी को विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह सम्मान मिला। प्रारंभिक शिक्षा पूसा स्थित उच्च विद्यालय से प्राप्त करने के बाद उन्होंने लंगट सिंह कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। बीएससी मैथमेटिक्स ऑनर्स के दौरान पिता के निधन के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन बाद में उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय में प्रवेश कर स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की।
उन्होंने ढोली कॉलेज में प्रोफेसर और संयुक्त निदेशक के रूप में सेवाएं दीं। बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में निदेशक और वर्ष 1988 से 1991 तक कुलपति के पद पर रहे। डॉ. त्रिवेदी ने देशभर में कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। अपने गांव में 85 एकड़ भूमि पर बिहार की पहली जलीय कृषि आधारित समेकित कृषि प्रणाली विकसित की। उन्होंने लीची उत्पादक संघ का गठन, नक्सल समस्या के समाधान और सामाजिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्तमान में वे ‘बिहार एक्वाकल्चर बेस्ड एग्रीकल्चर (बाबा)’ संस्था के माध्यम से कृषि और पशुपालन को बढ़ावा दे रहे हैं।
डॉ. श्याम सुंदर मखरिया: चिकित्सा शोध में मिसाल
मुजफ्फरपुर जिले के सूतापट्टी इलाके में जन्मे डॉ. श्याम सुंदर मखरिया को चिकित्सा शोध में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री से नवाजा गया। वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित प्राध्यापक और रामबाग रोड स्थित कालाजार चिकित्सा अनुसंधान केंद्र के निदेशक हैं।
नौ भाई-बहनों में सबसे बड़े डॉ. मखरिया ने कालाजार और पीकेडीएल जैसी जानलेवा बीमारियों पर दशकों तक शोध किया। उनके प्रयासों से अब तक 20 हजार से अधिक मरीजों का निःशुल्क उपचार संभव हुआ है। उन्होंने जिला स्कूल से 10वीं-12वीं, आरडीएस कॉलेज से स्नातक और 1972 में बीएचयू से चिकित्सा शोध में प्रवेश किया। वर्ष 1994 में उन्होंने कालाजार मेडिकल रिसर्च सेंटर की स्थापना की, जिसे उन्होंने अपने दादा सीताराम मखरिया के नाम पर रखा।
परिवार और जिले में खुशी
पद्मश्री सम्मान की सूचना मिलने पर डॉ. श्याम सुंदर ने स्वयं अपने भाईयों को फोन कर यह खुशी साझा की। इस खबर ने उनके परिवार और मुजफ्फरपुर जिले में गर्व और उत्साह की लहर दौड़ा दी।
यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों की मान्यता है, बल्कि मुजफ्फरपुर जिले की शिक्षा, विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में राष्ट्रीय योगदान को भी उजागर करता है।