
कोहिमा/नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में भारत के विभिन्न राज्यों की झांकियों ने अपनी सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया। इस बार नागालैंड की झांकी में हॉर्नबिल महोत्सव को प्रस्तुत किया गया, जिसे राज्य की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और सामुदायिक आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रतीक माना जाता है। झांकी के केंद्र में राजसी ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पक्षी खड़ा था।
हॉर्नबिल महोत्सव क्या है?
यह नगालैंड की लड़ाकू जनजातियों का सबसे बड़ा वार्षिक उत्सव है।
महोत्सव हर साल दिसंबर के पहले सप्ताह में कोहिमा जिले के किसामा हेरिटेज विलेज में आयोजित होता है।
यह दस दिवसीय कार्यक्रम नागालैंड के सभी जातीय समूहों की संस्कृति, रीति-रिवाज, नृत्य, गीत और भोजन की विविधता को प्रदर्शित करता है।
महोत्सव का नाम ग्रेट हॉर्नबिल पक्षी पर रखा गया है, जो जनजातियों के लोकगीतों और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।
संस्कृति और मनोरंजन का संगम
महोत्सव में पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, खेल-कूद, तीरंदाजी, नागा कुश्ती और स्वदेशी खेल शामिल हैं।
शिल्पकला, चित्रकला, लकड़ी की नक्काशी और मूर्तिकला की प्रदर्शनी भी आयोजित होती है।
खाद्य स्टॉल, हर्बल दवाओं के स्टॉल और फूलों की प्रदर्शनी देखने को मिलती है।
उत्सव के मुख्य आकर्षणों में हॉर्नबिल इंटरनेशनल रॉक फेस्टिवल शामिल है, जिसमें स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय रॉक बैंड प्रदर्शन करते हैं।
नागालैंड की यह झांकी दिल्ली परेड में राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के साथ-साथ भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और पारंपरिक जीवनशैली को भी उजागर करती है।