
नई दिल्ली। महिलाओं में तेजी से फैलती एक गंभीर लेकिन “साइलेंट” बीमारी पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) आज एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार औसतन हर पाँच में से एक महिला पीसीओएस से प्रभावित है, लेकिन इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य हार्मोनल बदलाव, उम्र या लाइफस्टाइल से जोड़कर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यही लापरवाही आगे चलकर मोटापा, बांझपन, डायबिटीज़ और मानसिक समस्याओं का कारण बन सकती है।
पीसीओएस महिलाओं के शरीर में हार्मोन असंतुलन की स्थिति है, जो प्रजनन तंत्र के साथ-साथ मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं और समय रहते पहचान नहीं हो पाती।
किशोरावस्था में प्यूबर्टी समझ ली जाती है बीमारी
विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरियों में पीसीओएस के शुरुआती संकेतों को अक्सर प्यूबर्टी से जुड़ा सामान्य बदलाव मान लिया जाता है। आर्टेमिस हॉस्पिटल की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. निधि राजोतिया के अनुसार,
“कई महिलाओं को पीसीओएस होता है, लेकिन उन्हें यह एहसास ही नहीं होता। वे इसके लक्षणों को स्ट्रेस, लाइफस्टाइल या सामान्य हार्मोनल उतार-चढ़ाव समझ लेती हैं।”
अचानक वजन बढ़ना सबसे बड़ा संकेत
पीसीओएस में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है और पेट के आसपास फैट तेजी से जमा होता है। महिलाएं इसे गलत खानपान या एक्सरसाइज की कमी मानकर अनदेखा कर देती हैं, जबकि यह बीमारी का स्पष्ट संकेत हो सकता है।
मूड स्विंग और मानसिक असर
बार-बार मूड बदलना, चिड़चिड़ापन, तनाव और डिप्रेशन भी पीसीओएस के आम लक्षण हैं। लेकिन अधिकतर महिलाएं इसे भावनात्मक कमजोरी या पारिवारिक तनाव से जोड़ देती हैं, जबकि इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन बड़ी वजह होता है।
पीरियड्स का अनियमित होना चेतावनी
पीसीओएस में शरीर नियमित रूप से ओव्यूलेशन नहीं कर पाता, जिससे पीरियड्स देर से आना, बार-बार मिस होना या फ्लो में बदलाव देखने को मिलता है। यह लक्षण भी अक्सर वजन बढ़ने या तनाव के नाम पर टाल दिया जाता है।
पीसीओएस के अन्य प्रमुख लक्षण
चेहरे और शरीर पर अनचाहे बालों का बढ़ना
मुंहासे और अत्यधिक ऑयली स्किन
बालों का झड़ना या पतला होना
लगातार थकान और ऊर्जा की कमी
समय पर पहचान से संभव है नियंत्रण
विशेषज्ञों का कहना है कि पीसीओएस का समय पर पता लग जाए तो इसे लाइफस्टाइल में बदलाव, संतुलित आहार और चिकित्सकीय सलाह से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए महिलाओं और किशोरियों में जागरूकता बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी लक्षण की स्थिति में चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।