
नई दिल्ली: 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर यूरोपीय संघ (EU) की मौजूदगी और उसकी सैन्य टुकड़ी के कर्तव्य पथ पर परेड में शामिल होने से खालिस्तानी संगठनों और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI में हड़कंप मच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और यूरोपीय संघ के बढ़ते तालमेल ने आतंकवादी और भारत-विरोधी समूहों की नींद उड़ा दी है।
इस साल परेड में यूरोपीय संघ के दो प्रमुख नेता—यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनके सामने भारतीय सशस्त्र सेनाओं के साथ यूरोपीय संघ की सैन्य टुकड़ी की कदमताल ने यह संदेश दिया कि भारत की संप्रभुता और वैश्विक कद मजबूत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खालिस्तानी संगठन और ISI अब डर रहे हैं कि उनके भारत-विरोधी एजेंडे को वैश्विक मंच पर बढ़ावा देना मुश्किल हो जाएगा। यूरोप में भारत के प्रति बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और खुली सराहना ने खालिस्तानियों की आशाओं पर पानी फेर दिया है। नॉर्वे सहित यूरोप के कई देश इस साझेदारी की खुले तौर पर सराहना कर रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि खालिस्तानी हिंसक तत्वों की यूरोप में जड़ें मजबूत होने पर यह उनके लिए खतरा बन सकता है, इसलिए उन्हें डर है कि उनके एजेंडे को अब आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। भारत-यूरोप के बढ़ते संबंधों ने खालिस्तानी और ISI समूहों के लिए नया तनाव पैदा कर दिया है।