
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) को दिसंबर तिमाही में तगड़ा झटका लगा है। तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर 2025) में कंपनी का मुनाफा 78% गिरकर 549.1 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 2,448.8 करोड़ रुपये था।
मुनाफा गिरने के कारण
इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन की कुल आय इस तिमाही में बढ़कर 24,540.6 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में 22,992.8 करोड़ रुपये थी। मुनाफे में भारी गिरावट के पीछे मुख्य कारण उड़ानों में हुई व्यापक गड़बड़ी और देश में लागू हुए नए लेबर कोड को माना जा रहा है। दिसंबर की शुरुआत में परिचालन व्यवधान के कारण नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन के शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम को 10 फरवरी तक 10 प्रतिशत तक घटा दिया था।
यात्रियों के लिए रिफंड और मुआवजा
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इंडिगो को रद्द टिकटों की धन वापसी और मुआवजे के संबंध में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कंपनी ने बताया कि रिफंड की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और नियमों के अनुसार मुआवजे की पेशकश की जा रही है।
- सबसे बुरी तरह प्रभावित उड़ानों के लिए 10,000 रुपये के वाउचर दिए जा रहे हैं।
- यात्रियों के लिए मुआवजे का दावा करने हेतु विशेष वेबसाइट स्थापित की गई है।
DGCA के अनुसार, 3 से 5 दिसंबर 2025 के बीच 2,507 उड़ानें रद्द और 1,852 उड़ानों में देरी हुई। इससे देश भर में तीन लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए।
एयरलाइन पर कार्रवाई
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA ने कार्रवाई करते हुए:
- एयरलाइन के सिनियर वाइस–प्रेजिडेंट को बर्खास्त किया।
- कंपनी पर 22 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
- बेहतर अनुपालन के लिए 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी मांगी।
- कुछ वरिष्ठ अधिकारियों, जैसे सीईओ और सीओओ को चेतावनी दी।
मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को होगी।
निष्कर्ष:
इंडिगो के लिए यह तिमाही न केवल वित्तीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रही, बल्कि परिचालन और ग्राहक विश्वास बनाए रखने की भी परीक्षा रही। विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनी को आगामी तिमाही में बेहतर संचालन और नियामक अनुपालन पर ध्यान देना होगा।