
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद केंद्र सरकार देश की सेनाओं के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 में रक्षा मंत्रालय के खर्च में अभूतपूर्व वृद्धि की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार, इस बार कुल बजट 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है, जिसमें सिर्फ हथियारों की खरीद के लिए 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान रखा जा सकता है। यदि यह सही साबित होता है, तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट होगा।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर सफलतापूर्वक कार्रवाई की थी। इसी के बाद यह पहला बजट पेश किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय में ‘डबल-डिजिट’ यानी 10% या उससे अधिक की वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
तीनों सेनाओं को होगा फायदा, सबसे ज्यादा वायु सेना को
बजट में बढ़ोतरी का लाभ तीनों सेनाओं को मिलेगा, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा वायु सेना को होने की उम्मीद है। आगामी वित्तीय वर्ष में एयर–टू–एयर रिफ्यूलर और एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) जैसी अत्याधुनिक तकनीकें खरीदी जा सकती हैं। रिफ्यूलर के लिए अमेरिका और इज़राइल से बातचीत चल रही है, जबकि AWACS के लिए ब्राज़ील के साथ संभावित जुड़ाव हो सकता है।
बड़ी डील की संभावना
रक्षा अधिग्रहण परिषद के अनुमोदन के बाद 114 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए 30 अरब यूरो का सौदा मार्च 2027 तक हो सकता है। इस सौदे में विमानों में स्वदेशी पुर्जों के इस्तेमाल और कीमतों पर बातचीत भी शामिल होगी। इसके अलावा, फ्रांस की कंपनी सफ्रान और DRDO के बीच विमान इंजनों के निर्माण के लिए लगभग 3 अरब यूरो का सहयोग प्रस्तावित है, जिसे कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) को भेजा जाएगा।
पिछले बजट की तुलना में बढ़ोतरी
पिछले वित्त वर्ष में रक्षा मंत्रालय का कुल खर्च 6,81,210.27 करोड़ रुपये था, जिसमें कैपिटल बजट 26% से अधिक यानी लगभग 1,80,000 करोड़ रुपये था। इस बार के बजट में ये आंकड़े पिछले साल की तुलना में काफी ऊपर रहने की संभावना है।
1 फरवरी से पेश होने वाला यह बजट भारतीय सेना के लिए न केवल शक्ति वृद्धि का प्रतीक होगा, बल्कि आधुनिक हथियारों और उपकरणों के जरिए देश की सुरक्षा को और मजबूत करेगा।