
नई दिल्ली।
बच्चे का पहली बार स्कूल जाना हर माता-पिता के लिए एक भावनात्मक और अहम फैसला होता है। आमतौर पर पेरेंट्स स्कूल का माहौल, सुरक्षा और पढ़ाने के तरीकों पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार एक बेहद जरूरी पहलू—बच्चे की सही उम्र—नज़रअंदाज़ हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत कम उम्र में बच्चे को प्ले स्कूल भेजने से उसमें सेपरेशन एंग्जायटी यानी माता-पिता से बिछड़ने का डर बढ़ सकता है।
पीडियाट्रिशियन और एक्सपर्ट डॉक्टर निमिषा अरोड़ा के अनुसार, प्ले स्कूल के लिए तीन साल की उम्र सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इस उम्र तक बच्चा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्कूल जाने के लिए अधिक तैयार होता है।
पेरेंट्स में बढ़ रहा है ‘फोमो’ का डर
डॉ. अरोड़ा बताती हैं कि आजकल माता-पिता में फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO) तेजी से बढ़ रहा है। जब वे देखते हैं कि आसपास के बच्चे डेढ़ या दो साल की उम्र में ही स्कूल जाने लगे हैं, तो उन्हें लगता है कि वे अपने बच्चे को पीछे छोड़ रहे हैं। इसी दबाव में कई बार बच्चे को समय से पहले स्कूल भेज दिया जाता है।
तीन साल की उम्र क्यों है बेहतर?
विशेषज्ञों के मुताबिक, तीन साल की उम्र तक बच्चे का भाषा विकास और संप्रेषण कौशल काफी हद तक विकसित हो जाता है। इस उम्र में बच्चा अपनी जरूरतें और भावनाएं शिक्षक को समझा सकता है और स्कूल में हुई घटनाओं के बारे में घर आकर माता-पिता को भी बता पाता है।
कम हो जाती है सेपरेशन एंग्जायटी
डॉ. अरोड़ा कहती हैं कि तीन साल की उम्र तक बच्चों में माता-पिता से अलग होने की चिंता काफी हद तक कम हो जाती है। वे दूसरे बच्चों के साथ घुलने-मिलने लगते हैं और नए माहौल को स्वीकार करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होते हैं।
ऊर्जा को मिलती है सही दिशा
इस उम्र के बच्चे ऊर्जा से भरपूर होते हैं और तेजी से सीखते हैं। प्ले स्कूल का संरचित वातावरण उनकी इस ऊर्जा को सही दिशा देने में मदद करता है, जिससे उनका समग्र विकास बेहतर तरीके से हो पाता है।
स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी कम
विशेषज्ञों के अनुसार, तीन साल तक अधिकांश बच्चे टॉयलेट ट्रेनिंग सीख लेते हैं। इससे यूटीआई, कब्ज और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम हो जाता है, जो कम उम्र में स्कूल भेजने पर देखने को मिल सकती हैं।
हालांकि, डॉक्टर यह भी स्पष्ट करती हैं कि यदि बच्चा न्यूक्लियर फैमिली में रह रहा है और अत्यधिक स्क्रीन टाइम में उलझा हुआ है, तो माता-पिता बिना किसी अपराधबोध के उसे तीन साल से पहले भी प्ले स्कूल भेजने का फैसला कर सकते हैं।
निष्कर्षतः, बच्चे को प्ले स्कूल भेजने का निर्णय जल्दबाजी या सामाजिक दबाव में नहीं, बल्कि उसकी मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक तैयारी को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।