Friday, January 23

मुजफ्फरपुर क्यों नहीं बन पाया बिहार का ‘मैनचेस्टर’? नीतीश कुमार के दौरे से पहले जानिए वजह

 

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मुजफ्फरपुर: बिहार का मुजफ्फरपुर कभी सूती वस्त्र उद्योग के केंद्र के रूप में ‘मैनचेस्टर’ बनने का सपना देख रहा था। यह सपना समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने 1978-80 के दौरान रखा था। तब कहा गया था कि मुजफ्फरपुर जल्द ही सूती वस्त्र उद्योग के लिए अपनी पहचान बना लेगा।

 

बेला औद्योगिक क्षेत्र की शुरुआत और गिरावट

बेला औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना मुजफ्फरपुर से सांसद रहे स्व. जॉर्ज फर्नांडिस ने की थी। प्रारंभिक 8 वर्षों में लगभग 35 औद्योगिक इकाइयाँ चलीं। लेकिन 1990 के बाद ‘जंगल राज’ और सरकार की उपेक्षा ने क्षेत्र की कमर तोड़ दी। बुनियादी संसाधनों की कमी, बढ़ता अपराध और अपर्याप्त प्रशासनिक समर्थन के कारण बेला औद्योगिक क्षेत्र धीरे-धीरे मृतप्राय हो गया। 2010 के बाद स्थिति में आंशिक सुधार हुआ और 2020 से क्षेत्र में बदलाव की झलक दिखने लगी।

 

टेक्सटाइल और लेदर क्लस्टर का विकास

बीएड (BIDA) के माध्यम से टेक्सटाइल और लेदर क्लस्टर का विस्तार करने की कोशिश की गई। 10 नए शेड बनाए जाने थे, जिससे लगभग 5,000 लोगों को रोजगार मिलना था। वर्तमान में बेला औद्योगिक क्षेत्र में टेक्सटाइल के 15 शेड और लेदर के 24 शेड में उत्पादन कार्य चल रहा है। यहाँ बैग क्लस्टर, फूड प्रोसेसिंग प्लांट, पोल्ट्री फीड इंडस्ट्रीज समेत लगभग दो दर्जन यूनिट सक्रिय हैं। इसके अलावा मोतीपुर चीनी मिल के बड़े भूखंड पर मेगा फूडपार्क का निर्माण भी प्रगति पर है।

 

मुख्य बाधाएं: क्यों 45 वर्ष में नहीं हुआ अपेक्षित विस्तार

मुजफ्फरपुर को टेक्सटाइल हब बनाने में मुख्य बाधाएं रही हैं:

 

औद्योगिक बुनियादी सुविधाओं की कमी: स्वच्छ पेयजल, शौचालय, सुरक्षा, बिजली आदि।

औद्योगिक निवेश की धीमी गति और योजनाओं का देरी से क्रियान्वयन।

शहर का ट्रैफिक और बेहतर कनेक्टिविटी की कमी।

 

इन कारणों से आज भी बड़े टेक्सटाइल ब्रांड मुजफ्फरपुर में नहीं आए और व्यापारी गोरखपुर जैसे विकसित उद्योग केंद्रों की ओर चले गए।

 

समृद्धि यात्रा से उम्मीदें

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज मुजफ्फरपुर दौरे पर हैं। उनकी समृद्धि यात्रा के दौरान बेला औद्योगिक क्षेत्र के विकास में आ रही बाधाओं का समाधान और ‘सात निश्चय पार्ट 3’ में औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने का रोडमैप सामने आने की उम्मीद है।

 

मुजफ्फरपुर की जनता को अब यह देखना है कि क्या ये दौरा उनके पारंपरिक सूती और ऊनी वस्त्र उद्योग के हब को नई दिशा दे पाएगा।

 

 

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