Thursday, January 22

दिल्ली के नालों की ड्रोन से निगरानी, यमुना की सफाई के लिए तैयार हुआ बड़ा एक्शन प्लान

 

This slideshow requires JavaScript.

नई दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में यमुना की सफाई को लेकर गठित हाई लेवल कमिटी की बुधवार को पहली बैठक हुई। बैठक में यमुना की मौजूदा स्थिति, सीवेज ट्रीटमेंट, नालों की सफाई और अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन नेटवर्क पर चल रहे कामों का विस्तृत जायजा लिया गया। सीएम ने कहा कि यमुना सिर्फ नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की जीवन रेखा है, और इसे साफ रखने के लिए वैज्ञानिक योजना और पड़ोसी राज्यों के सहयोग से लगातार काम किया जा रहा है।

नालों की निगरानी के लिए नया सिस्टम
मुख्यमंत्री ने बताया कि नालों की निगरानी के लिए अब पुख्ता सिस्टम बनाया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें हर महीने 47 तय स्थानों पर पानी की जांच करेंगी। नजफगढ़ और शाहदरा नालों से जुड़े सभी छोटे नालों की पहचान और जांच ड्रोन सर्वे के माध्यम से जनवरी तक पूरी की जाएगी।

यमुना में गिरने वाले नाले और क्षमता बढ़ाई जाएगी
नजफगढ़ ड्रेन में हरियाणा के 6 नाले गिरते हैं, जो दूषित पानी का लगभग 33% हैं। शाहदरा ड्रेन में उत्तर प्रदेश के 4 बड़े नाले आते हैं, जो करीब 40% प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। दिल्ली में 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) मिलकर रोजाना 814 एमजीडी गंदा पानी साफ कर रहे हैं, जिसे बढ़ाकर 1500 एमजीडी किया जाएगा। इसके लिए पुरानी मशीनों को अपग्रेड किया जाएगा और दिसंबर 2027 तक 35 नए छोटे डिसेंट्रलाइज्ड STP लगाए जाएंगे।

सीवर नेटवर्क और अनधिकृत कॉलोनियों में सुधार
दिसंबर 2028 तक नालों के पास 460 एमजीडी क्षमता वाले STP लगाए जाएंगे। अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन नेटवर्क बिछाने का काम दिसंबर 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा। अभी 675 जेजे क्लस्टर में से 574 में सीवर लाइन डालने का काम पूरा हो चुका है। 1799 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क का काम इसी समय तक पूरा होगा।

गाद निपटारे के लिए प्रोसेसिंग यूनिट
सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि नालों से निकलने वाली गाद के निपटारे के लिए बायोमाइनिंग और प्रोसेसिंग के 4 प्लांट लगाए जाएं। औद्योगिक इलाकों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को रोकने के लिए CETP की नियमित जांच और सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।

2028 तक यमुना पुनर्जीवन मिशन
बैठक के बाद मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि 2028 तक यमुना पुनर्जीवन मिशन के तहत सभी बड़े नालों और सीवर से जुड़े काम पूरे कर लिए जाएंगे। दिल्ली सरकार और MCD के सभी विभाग मिलकर इस काम को कोआर्डिनेशन के साथ करेंगे। यमुना में गिरने वाले 22 बड़े नालों की ड्रोन से मैपिंग होगी और पानी की हर महीने जांच की जाएगी।

यमुना की सफाई पर क्यों है फोकस?
यमुना की सफाई के लिए केवल दिल्ली सरकार के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, पड़ोसी राज्यों की भी अहम भूमिका है। केंद्र सरकार भी यमुना की सफाई की योजना और निगरानी में सक्रिय है और दिल्ली को पर्याप्त फंड उपलब्ध करा रही है।

 

Leave a Reply