
नई दिल्ली, 22 जनवरी: अरावली पर्वत में अवैध खनन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया और राज्य सरकारों को अरावली में किसी भी अवैध खनन गतिविधि को रोकने का स्पष्ट निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने बनाया नया पैनल
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ, जिसका नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं, ने अरावली को लेकर एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने का निर्देश दिया है। सीजेआई ने कहा कि यह कमेटी पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और माइनिंग एक्सपर्ट्स से बनेगी और कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत रिपोर्ट तैयार करेगी।
राज्यों के लिए सख्त चेतावनी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अवैध खनन एक गंभीर अपराध है और इसे रोकना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को मशीनरी और प्रशासनिक संसाधनों का पूरा उपयोग करने का निर्देश दिया, ताकि अरावली पर्वत के विनाश को रोका जा सके।
राजस्थान सरकार से विशेष निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से कहा कि वह यह सुनिश्चित करे कि कोई भी गैरकानूनी खनन न हो। इसके साथ ही, सभी पक्षकारों से विशेषज्ञों के नाम सुझाने को कहा गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘अरावली’ और ‘जंगलों’ की परिभाषा की जांच अलग से होगी। एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को चार हफ्ते का समय दिया गया है, ताकि वे अरावली की परिभाषा पर विस्तृत नोट पेश कर सकें।
पिछले आदेशों की पृष्ठभूमि
राजस्थान के किसानों ने कोर्ट को बताया कि पिछले आदेशों के बावजूद खनन पट्टे जारी किए जा रहे हैं और पेड़ काटे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है और अवैध खनन को रोकना आवश्यक है। कोर्ट का कहना है कि दोनों मुद्दों – अवैध खनन और अरावली की परिभाषा – पर अलग-अलग विचार किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम अरावली पर्वत के संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।