
नई दिल्ली: मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की ‘सनातन धर्म’ पर टिप्पणियों को ‘तोड़-मरोड़कर पेश करने’ के आरोप में 2023 में दर्ज की गई अमित मालवीय के खिलाफ प्राथमिकी को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि मालवीय पर दर्ज मामला कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग था और प्रतिक्रिया व्यक्त करना अपराध नहीं है।
भाजपा ने अदालत के फैसले को द्रमुक और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन की ‘हिंदू विरोधी सोच’ पर कड़ा झटका बताया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उदयनिधि स्टालिन के घृणास्पद भाषण पर सवाल उठाना या जवाब देना अपराध नहीं है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि द्रमुक सरकार ने मालवीय के खिलाफ प्राथमिकी केवल इसलिए दर्ज कराई थी ताकि सच बोलने पर उन्हें दबाया जा सके। उन्होंने मांग की कि उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को पद से तुरंत हटाया जाए और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।
उल्लेखनीय है कि उदयनिधि स्टालिन ने ‘सनातन धर्म’ को समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ बताते हुए इसे समाप्त करने की बात कही थी। इसके जवाब में मालवीय ने इसे हिन्दू समाज के खिलाफ बताया और उपयुक्त प्रतिक्रिया दी थी।