
नई दिल्ली: पश्चिमी देशों के बैन के बावजूद भारत में रूसी तेल का आयात जारी है। हालांकि रूस ने तेल भेजने के तरीके में बदलाव किया है और कुछ भारतीय कंपनियों ने रूसी तेल की खरीद बंद कर दी है।
बैन के बाद नई व्यवस्था
अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों पर बैन लगाया, जिससे भारत को आने वाले तेल की सप्लाई प्रभावित हुई। इसके बावजूद रूस ने छोटे-छोटे व्यापारियों के जरिए तेल भेजना शुरू कर दिया। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में रूस से आने वाले कुल तेल का लगभग 43% (करीब 0.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन) पांच नए व्यापारियों के जरिए आया है।
मुख्य जहाज और सप्लायर्स
जनवरी के पहले 15 दिनों में भारत आने वाले तेल के जहाजों में रेडवुड ग्लोबल सप्लाई, विस्टुला डेल्टा, एथोस एनर्जी, अल्गफ मरीन और स्लावियांस्क ईसीओ शामिल हैं। इनमें से कुछ रूसी और कुछ UAE से जुड़े हुए हैं।
रोसनेफ्ट और लुकोइल की सप्लाई में कमी
अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रोसनेफ्ट अब भी भारत का दूसरा सबसे बड़ा रूसी तेल सप्लायर है। लेकिन इस महीने रोसनेफ्ट से आने वाले तेल की मात्रा पिछले साल के औसत से 75% कम होकर 2,25,000 बैरल प्रतिदिन रह गई। वहीं लुकोइल की सप्लाई भी 43,000 बैरल प्रतिदिन रह गई, जो पिछले साल के औसत से 84% कम है।
नए बड़े सप्लायर बने व्यापारी
इस महीने रूस से सबसे ज्यादा तेल भेजने वाला सप्लायर रुसएक्सपोर्ट बन गया। इसने 2,55,000 बैरल प्रतिदिन तेल भेजा। इसके अलावा रेडवुड ग्लोबल सप्लाई ने 2 लाख बैरल, विस्टुला डेल्टा 1,45,000 बैरल, एथोस एनर्जी 74,000 बैरल, अल्गफ मरीन 50,000 बैरल और स्लावियांस्क ईसीओ 43,000 बैरल प्रतिदिन तेल भेजा।
कौन खरीद रहा है, कौन रोक रहा है
भारतीय कंपनियां अब रूसी तेल के स्रोत के प्रति सतर्क हो गई हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जनवरी के पहले 15 दिनों में कोई तेल नहीं खरीदा। HPCL, HMEL और MRPL ने भी रूस से तेल लेना बंद किया। वहीं, Indian Oil, Rosneft समर्थित Nayara Energy और BPCL रूस से तेल खरीद जारी रखे हुए हैं।