
एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा हिजाब पहनने वाली महिला के प्रधानमंत्री बनने संबंधी बयान पर सियासत तेज़ हो गई है। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखा रुख अपनाया और कहा कि फिलहाल इस तरह के मुद्दों पर बहस की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि देश के सामने कई गंभीर और बुनियादी समस्याएं मौजूद हैं।
इमरान मसूद ने कहा कि असली दिक्कत यह नहीं है कि हिजाब पहनने वाली महिला के प्रधानमंत्री बनने की बात की जा रही है, बल्कि समस्या यह है कि हिजाब को निशाना बनाकर समाज में नफरत फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिजाब पहनना कोई अपराध नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा है।
कांग्रेस सांसद ने उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में भी महिलाएं सिर पर पल्लू रखती हैं। पल्लू हो या हिजाब— दोनों ही संस्कृति के प्रतीक हैं। ऐसे में इन पर आपत्ति जताना समझ से परे है। उन्होंने सवाल उठाया कि हिजाब के नाम पर नफरत फैलाने से आखिर किसका भला होगा?
इमरान मसूद ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश के संविधान में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि कोई मुसलमान प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। जब संविधान इसकी इजाजत देता है, तो इस तरह के बयान देकर अनावश्यक विवाद खड़ा करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि नेता शिक्षा, बेरोज़गारी, महंगाई और विकास जैसे असली मुद्दों पर चर्चा करें।
ओवैसी के बयान से बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में एक बार फिर यह बयान दिया कि वे एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला को देश का प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसा सपना देखना गुनाह है और क्या भारत का संविधान किसी को ऐसा सपना देखने से रोकता है?
ओवैसी ने कहा कि वे पिछले दो वर्षों से यह बात कह रहे हैं कि उनकी ख्वाहिश और कोशिश है कि देश की प्रधानमंत्री हिजाब पहनने वाली महिला बने। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को इससे परेशानी है, तो वह पाकिस्तान की भाषा बोल रहा है।
ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज़ हो गई है और अलग-अलग दलों के नेता अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।