Saturday, January 24

प्रयागराज में शंकराचार्य–प्रशासन टकराव: कौन हैं IPS जोगिंदर कुमार, जिन पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लगाए गंभीर आरोप

 

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माघ मेला 2026 के दौरान मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम नोज तक पालकी के साथ जाने से रोके जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटनाक्रम को लेकर शंकराचार्य ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर IPS जोगिंदर कुमार पर सीधे और तीखे आरोप लगाए हैं, जिससे प्रशासन और संत समाज के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या के दिन उनके अनुयायियों के साथ पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की की गई, जिसमें कई साधु-संत घायल हुए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस कमिश्नर ने उनसे आपत्तिजनक भाषा में बात की और धमकी भरे लहजे का इस्तेमाल किया। शंकराचार्य के इन आरोपों के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी गरमा गया है।

 

कौन हैं IPS जोगिंदर कुमार

 

IPS जोगिंदर कुमार 2007 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं। वे अपनी सख्त कार्यशैली और पेशेवर निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भरोसेमंद अधिकारियों में उनकी गिनती होती है। इससे पहले IG कानपुर के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर कई कड़े कदम उठाए थे।

 

मूल रूप से राजस्थान के बाड़मेर जिले के निवासी जोगिंदर कुमार का जन्म 5 अप्रैल 1978 को हेमा राम के परिवार में हुआ था। उन्होंने राजनीतिशास्त्र में स्नातकोत्तर तक शिक्षा प्राप्त की है। आईपीएस बनने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित हुआ।

 

कमिश्नरेट प्रणाली के तहत प्रमोशन मिलने के बाद 11 मई 2025 को उन्हें प्रयागराज का पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया। इससे पहले वे वर्ष 2016 में मई से अक्टूबर तक प्रयागराज के पुलिस कप्तान के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।

 

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज

 

इस विवाद में विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से फोन पर बातचीत कर घटनाक्रम की जानकारी ली। वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने प्रयागराज पहुंचकर शंकराचार्य से मुलाकात की। विपक्षी दलों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रदेश सरकार को घेरा है।

 

हरिद्वार में साधु-संतों का विरोध

 

प्रयागराज की घटना के विरोध में हरिद्वार के हर की पैड़ी पर भारत साधु समाज और श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के कार्यकर्ताओं ने सांकेतिक धरना दिया। साधु-संतों ने शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा की।

 

श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने इसे “सनातन परंपराओं का अपमान” बताते हुए चिंता जताई। भारत साधु समाज के राष्ट्रीय संगठन मंत्री स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि शंकराचार्य का पद प्रशासन द्वारा नहीं, बल्कि संत समाज द्वारा निर्धारित होता है। उन्होंने सरकार से शंकराचार्य से औपचारिक माफी की मांग की है।

 

विवाद गहराने के संकेत

 

प्रशासन और संत समाज के बीच बढ़ता यह टकराव अब राज्य की राजनीति में भी नई बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी।

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