Tuesday, January 20

प्रयागराज माघ मेला विवाद: कौन हैं चार शंकराचार्य और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को क्यों घेरा विवाद

 

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प्रयागराज। माघ मेला के दौरान 18 जनवरी को मौनी अमावस्या स्नान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान करने से रोक दिए जाने के बाद मेला विवादित हो गया। समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प हुई, और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए। इस घटना के बाद देश में चार प्रमुख मठों और उनके शंकराचार्यों को लेकर लोगों में सवाल उठ रहे हैं।

 

भारत के चार प्रमुख मठ और उनके शंकराचार्य

 

  1. ज्योतिर्मठ, उत्तराखंड

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित ज्योतिर्मठ उत्तर भारत का प्रमुख मठ है। वर्तमान शंकराचार्य हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। हालांकि उनके शंकराचार्य बनने को लेकर विवाद है। अन्य मठों के शंकराचार्य उन्हें मान्यता नहीं देते और मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद स्वयं को शंकराचार्य घोषित किया।

 

  1. शारदा मठ, द्वारका, गुजरात

पश्चिम दिशा में स्थित शारदा मठ विद्या की देवी सरस्वती को समर्पित है और आध्यात्मिक शिक्षा व सेवा प्रदान करता है। इसके वर्तमान शंकराचार्य हैं स्वामी सदानंद सरस्वती।

 

  1. गोवर्धन मठ, पुरी, ओडिशा

पूर्व दिशा में स्थित गोवर्धन मठ अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों का प्रचार करता है। इसके शंकराचार्य हैं स्वामी निश्चलानंद सरस्वती।

 

  1. श्रृंगेरी मठ, कर्नाटक

दक्षिण भारत के चिक्कमगलुरु जिले में तुंगा नदी के किनारे स्थित श्रृंगेरी मठ को श्रृंगेरी शारदा पीठम भी कहते हैं। इसके शंकराचार्य हैं भारती तीर्थ पीठ।

 

विवाद और राजनीति

अधिकारियों ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य का कोई विशेष प्रोटोकॉल नहीं दिया गया। उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें कभी भी उत्तराधिकारी नहीं बनाया था। इसके बावजूद अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को शंकराचार्य घोषित कर लिया, जिसे लेकर अन्य मठों के शंकराचार्यों और समर्थकों में असंतोष है।

 

2025 महाकुंभ में तीन शंकराचार्य साथ में स्नान

महाकुंभ 2025 में द्वारका पीठ के स्वामी सदानंद सरस्वती और शृंगेरी मठ के श्री विधुशेखर भारती ने अविमुक्तेश्वरानंद के साथ स्नान किया था। पुरी पीठ के स्वामी निश्चलानंद सरस्वती मेला में आए थे, लेकिन शंकराचार्यों के साथ स्नान के लिए नहीं गए थे।

 

माघ मेला विवाद ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस तेज कर दी है, और लोग अब चारों मठों और उनके शंकराचार्यों की मान्यता और अधिकारों पर चर्चा कर रहे हैं।

 

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