
नई दिल्ली: लेखक और विचारक आचार्य प्रशांत ने हाल ही में बेटियों के प्रति पिता की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपने इंस्टाग्राम वीडियो में उन्होंने कहा कि अगर पिताओं को सच में अपनी बेटियों से प्यार होता, तो क्या वे उन्हें शादी के लिए सिर्फ इसलिए धकेल देते कि खुद अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएं। उनका कहना है कि इस तरह की सोच बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।
पिता-बेटी के रिश्ते पर सवाल
आचार्य प्रशांत ने वीडियो में कहा, “क्या आपको अपनी बेटी से कभी सच्चा प्यार था? अगर होता, तो क्या आप उसे सिर्फ कह देते, ‘जा, शादी कर ले’, ताकि आप खुद से कह सकें कि ‘चलो, दो लड़कियां थीं, एक की तो शादी हो गई’? कई माता-पिता यही सोचते हैं कि पहली बेटी की शादी हो गई, अब दूसरी भी निपट जाए, बस बैतरणी पार हो जाए।” उन्होंने इसे पिता की जिम्मेदारी और सच्चे प्यार के अभाव का उदाहरण बताया।
शादी सिर्फ घर बदलना नहीं
लेखक ने आगे कहा कि शादी कोई छोटी बात नहीं होती। लड़की को अपना घर छोड़कर किसी और के घर जाना होता है, जहां हर चीज़ अलग होती है—खाना-पीना, लोग, वातावरण। इसके साथ ही उसे एक नया किरदार निभाना पड़ता है—पत्नी और बहू बनना। “शादी के साथ केवल घर नहीं बदलता, बल्कि जिंदगी के कई पहलू बदल जाते हैं, क्योंकि अब शारीरिक और मानसिक जिम्मेदारियां भी जुड़ जाती हैं।”
प्रेमहीन रिश्ता तनाव और अवसाद का कारण बन सकता है
आचार्य प्रशांत ने जोर देकर कहा कि अगर माता-पिता किसी को प्रेमहीन रिश्ते में डालते हैं, तो यह न केवल लड़की के लिए बल्कि उसके जीवन साथी के लिए भी तनाव और अवसाद का कारण बन सकता है। उनका मानना है कि खरा इंसान वही है, जो न खुद बर्दाश्त करता है कि कोई उसे दबाए, और न किसी की जिंदगी को बंधन में डालना चाहता है।
इस वीडियो के जरिए आचार्य प्रशांत ने पिता-पुत्री के रिश्ते और शादी के निर्णयों पर समाज में चल रही रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी है। उनका संदेश है कि बेटियों के साथ सच्चा प्यार और जिम्मेदारी तभी पूरी होती है, जब उन्हें मजबूर नहीं किया जाता और उनके फैसलों का सम्मान किया जाता है।