
भारतीय सड़कों पर आज भी लाखों वाहन ऐसे हैं जो बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के दौड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में यदि किसी तीसरे पक्ष को चोट या संपत्ति का नुकसान होता है, तो वाहन मालिक को भारी आर्थिक जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है। नुकसान का बिल कभी-कभी लाखों या करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।
थर्ड–पार्टी इंश्योरेंस क्या है?
थर्ड-पार्टी बीमा एक ऐसी पॉलिसी है जो वाहन मालिक (फर्स्ट पार्टी) और बीमा कंपनी (सेकंड पार्टी) के बीच होती है। इसके तहत किसी एक्सीडेंट में प्रभावित तीसरे पक्ष को हुए नुकसान का मुआवजा बीमा कंपनी देती है। सरल शब्दों में, थर्ड-पार्टी का मतलब है वाहन मालिक या चालक के अलावा कोई भी व्यक्ति, जैसे पैदल चलने वाला, दूसरी कार में बैठे लोग या अन्य वाहन चालक।
क्यों है थर्ड–पार्टी बीमा जरूरी?
थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस भारत के मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत अनिवार्य है। बिना बीमा वाहन चलाना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में जुर्माना, कारावास या वाहन जब्त किए जाने का प्रावधान है। सबसे अहम, बीमा न होने पर वाहन मालिक मुआवजे के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होता है, जो गंभीर नुकसान में लाखों या करोड़ों रुपये तक हो सकता है।
थर्ड–पार्टी इंश्योरेंस का खर्च
बीमा कंपनियों द्वारा थर्ड-पार्टी मोटर बीमा के लिए बेस प्रीमियम नियामक रूप से निर्धारित हैं:
दो–पहिया वाहन:
- 75 सीसी तक: ₹538
- 75–150 सीसी: ₹714
- 150–350 सीसी: ₹1,366
- 350 सीसी से ऊपर: ₹2,804
चार–पहिया वाहन:
- 1000 सीसी तक: ₹2,094
- 1000–1500 सीसी: ₹3,416
- 1500 सीसी से ऊपर: ₹7,897
यदि वाहन मालिक कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी लेता है, तो इसमें अपने वाहन का नुकसान भी शामिल होने के कारण प्रीमियम अधिक होता है। बीमा कंपनियां लॉन्ग-टर्म पॉलिसी भी देती हैं, जैसे नई कारों के लिए तीन साल और दोपहिया वाहन के लिए पांच साल का कवर।
सावधानी जरूरी
इंडियन बीमा रेगुलेटरी और डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) के अनुसार, जागरूकता की कमी के कारण भारत में अभी भी आधे से अधिक वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं। थर्ड-पार्टी बीमा केवल वैधानिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह वाहन मालिकों के लिए गंभीर वित्तीय सुरक्षा कवच भी है।
निष्कर्ष:
यदि आप वाहन चलाते हैं, तो थर्ड-पार्टी बीमा करवाना न केवल कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि यह किसी अप्रत्याशित दुर्घटना में आपके वित्तीय नुकसान को रोकने का सबसे सुरक्षित उपाय है।
डिस्क्लेमर: यह आलेख जानकारी देने के उद्देश्य से है। किसी भी निर्णय से पहले प्रमाणित बीमा विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।