
नई दिल्ली: सोने की बढ़ती कीमतों के चलते जापान का गोल्ड रिजर्व पिछले साल रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वर्तमान में जापान के गोल्ड रिजर्व का मूल्य 120 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, जो 2024 की तुलना में 60 प्रतिशत अधिक है और 2022 की तुलना में लगभग दोगुना हो गया है।
हालांकि इस दौरान जापान ने ज्यादा सोना नहीं खरीदा, लेकिन सोने की वैश्विक कीमतों में आई तेजी ने देश के रिजर्व को बढ़ा दिया। अब जापान के कुल फॉरेक्स रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 9% तक पहुँच गई है।
देश का कुल फॉरेक्स रिजर्व 1.17 ट्रिलियन डॉलर हो गया है, जो 2021 के बाद सबसे अधिक है। वहीं, देश के कुल रिजर्व एसेट्स 1.37 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच चुके हैं।
जापान ने अमेरिका के सरकारी बॉन्ड्स में अपनी हिस्सेदारी भी बढ़ाई है। यूएस ट्रेजरी में जापान की होल्डिंग 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गई है। इसके विपरीत भारत, चीन, ब्राजील और सऊदी अरब जैसे कई देश यूएस ट्रेजरी में अपनी होल्डिंग्स घटा चुके हैं और सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में जापान चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। चीन के पास 3.682 ट्रिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। इसके बाद स्विट्जरलैंड (927 अरब डॉलर) और भारत (662 अरब डॉलर) का स्थान है।
गोल्ड रिजर्व के मामले में अमेरिका पहले स्थान पर है (8,133 टन), इसके बाद जर्मनी, इटली, फ्रांस, रूस, चीन, स्विट्जरलैंड और भारत हैं। जापान का गोल्ड रिजर्व 846 टन है, जो इसे दुनिया के शीर्ष गोल्ड रिजर्व देशों में शामिल करता है।
जापान की इस रणनीति से यह साफ दिख रहा है कि देश अमेरिका और भारत के साथ मजबूत आर्थिक रिश्ते बनाए रखना चाहता है, जबकि चीन के साथ दूरी बरकरार रखी जा रही है।