
मेरठ/नई दिल्ली: प्रेग्नेंसी केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से भी चुनौतीपूर्ण जर्नी होती है। इस दौरान पतियों का साथ और समझ बेहद मायने रखता है। गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. समरा मसूद का कहना है कि पुरुषों को अपनी पत्नियों की परेशानियों को “ड्रामा” समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।
डॉ. मसूद बताती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान सांस फूलना, रात में नींद न आना, पैरों में खिंचाव और बेबी की किक के कारण महिला कई बार असहज महसूस करती हैं। “जब पत्नी कहती हैं कि उन्हें ठीक महसूस नहीं हो रहा है या उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वे ड्रामा कर रही हैं। यह सचमुच तकलीफ है,” उन्होंने कहा।
विशेषकर रात के समय, पैरों में खिंचाव और पेट में बढ़ोतरी के कारण नींद न आना आम बात है। इसके अलावा पेट बढ़ने के कारण फेफड़े पूरी तरह फैल नहीं पाते, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है।
डॉ. मसूद ने पतियों से आग्रह किया कि वे अपनी पत्नियों की बातों को सुनें, समझें और उनका सम्मान करें। “पत्नी को इस जर्नी में अकेला महसूस न हो, इसके लिए पति का इमोशनल सपोर्ट सबसे ज्यादा अहम है,” उन्होंने कहा।
नोट: यह जानकारी सोशल मीडिया रील पर आधारित है। स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।