
रामबाबू मित्तल, मुजफ्फरनगर: भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने युवा कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि अब संगठन के नाम पर किए जाने वाले तीन घंटे के धरने बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उनका कहना है कि धरना आखिरी विकल्प होता है, जिसमें कार्यकर्ता बोरिया-बिस्तर बांधकर घर से निकलते हैं और कम से कम 72 घंटे तक आंदोलन स्थल पर रहते हैं।
मुझे खेद है कि आजकल युवा किसान नेता धरना के नाम पर केवल तीन घंटे बैठकर लौट जाते हैं। यह सही नहीं है। अब इस पर सख्त लगाम लगेगा। टिकैत ने कहा कि यह नियम केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि सभी कार्यकर्ताओं पर लागू होगा।
युवा कार्यकर्ताओं के लिए विशेष ट्रेनिंग
सम्मेलन में टिकैत ने बताया कि संगठन में सबसे ज्यादा धरना-प्रदर्शन युवा वर्ग करता है, लेकिन कई बार वे संगठनात्मक नियमों की अनदेखी कर देते हैं। इसे देखते हुए अब 35 वर्ष से कम उम्र के कार्यकर्ताओं के लिए विशेष ट्रेनिंग शुरू की जाएगी। इसमें उन्हें संगठन के नियम, आंदोलन की रणनीति और जिम्मेदारियों का महत्व समझाया जाएगा। आवश्यक होने पर छंटनी भी की जाएगी।
नशे और अनुशासन पर सख्त रुख
राकेश टिकैत ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन में गुटखा और अन्य नशे के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। जो भी कार्यकर्ता नशा करता पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पर्यावरण और स्थानीय मुद्दों पर भी दिए निर्देश
टिकैत ने क्षेत्रीय समस्याओं जैसे धुएं, दूषित पानी, नालों की सफाई और सड़क पर जलभराव पर निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संगठन के नाम का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और किसी भी गलत गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।