Saturday, June 20

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थानेदार साहब के 6 “सदाबहार” गवाह, इनमें सब्जी वाला और ड्राइवर शामिल, 150 से ज्यादा FIR में एक ही नाम

 
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में पुलिस द्वारा फर्जी गवाह खड़ा कर केस दर्ज करने का बड़ा घोटाला सामने आया है। RTI कार्यकर्ता कुंज बिहारी तिवारी की शिकायत और डिजिटल रिकॉर्ड (CCTNS) की पड़ताल में खुलासा हुआ कि लौरी और नईगढ़ी थाना क्षेत्रों में दर्ज सैकड़ों FIR में बार-बार वही छह लोग गवाह बनाए गए।

 

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थाना प्रभारी पर आरोप

मामले के केंद्र में पूर्व थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान नियमित पुलिस कार्रवाई को सुविधाजनक बनाने, कागजों पर मामलों को सही ठहराने और भ्रष्टाचार को सक्षम करने के लिए कुछ पसंदीदा व्यक्तियों को बार-बार सरकारी गवाह बनाया गया। कुल मिलाकर 150 से अधिक संदिग्ध FIR में यही छह गवाह शामिल थे।

 

तबादले के बावजूद एक गवाह बना साथ

इन छह गवाहों में से एक अमित कुशवाहा लगातार सभी मामलों में गवाह बने रहे, यहां तक कि ठाकुर के तबादलों के बाद भी उनका नाम FIR में दर्ज होता रहा।

 

गवाहों का दावा

सब्जी बेचने वाले दिनेश कुशवाहा ने कहा, “मैंने केवल एक-दो मामलों में हस्ताक्षर किए थे, बाकी मामलों में मेरी जानकारी के बिना मेरा नाम गवाह बनाया गया।”

ड्राइवर राहुल विश्वकर्मा ने भी कहा, “मैं कार्रवाई के दौरान मौजूद नहीं था। कई मामलों में नाम मेरे सहमति के बिना दर्ज किया गया।”

 

एसपी ने लिया एक्शन

मऊगंज एसपी दिलीप सोनी ने रविवार को ठाकुर को नईगढ़ी थाना प्रभारी के पद से हटा दिया और कहा कि शिकायत की जांच चल रही है। एसपी ने बताया कि शिकायतकर्ता ने 145 FIR का विवरण साझा किया है और यह जांच का एकमात्र आधार नहीं है।

 

घोटाले की गंभीरता

RTI कार्यकर्ता कुंज बिहारी तिवारी का दावा है कि यह समस्या कहीं अधिक गहरी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 से अब तक लगभग 1,000 FIR में समान नाम पाए गए हैं। उन्होंने खुद भी एक मामले में इस अधिकारी के कारण फंसने का अनुभव साझा किया।

 

विशेष टिप्पणी:

यह मामला न केवल पुलिस में फर्जीवाड़ा और गवाहों का दुरुपयोग उजागर करता है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। आम जनता और पीड़ितों के लिए यह चिंता का विषय है कि कितनी FIR में गवाहों के नाम बिना उनकी सहमति के दर्ज किए जा रहे हैं।

 

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