
पटना। जमीन के बदले नौकरी घोटाले में सीबीआई ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी और तत्कालीन विशेष कार्य अधिकारी (OSD) भोला यादव (A-7) को साजिश का अहम कर्ताधर्ता बताया है। चार्जशीट के अनुसार, भोला यादव ही जमीन की “रेकी”, सौदेबाजी और बदले में रेलवे में नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया को जमीन पर अंजाम देता था। महुआबाग क्षेत्र में जमीन देखने से लेकर नौकरी का ऑफर देने और अंततः नामों को एमएस एक्सेल शीट में दर्ज कराने तक की भूमिका उसी की थी।
सीबीआई का दावा है कि उसके पास इस पूरे नेटवर्क को साबित करने के लिए मजबूत गवाह और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मौजूद हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, जमीन जिन लोगों से ली गई, उन्हीं या उनके रिश्तेदारों को रेलवे में ग्रुप–डी सब्स्टीट्यूट के रूप में नियुक्त किया गया। बाद में ये जमीनें घूम-फिरकर लालू यादव और उनके परिवार के पास पहुंचीं।
महुआबाग में सक्रिय भूमिका
चार्जशीट में उल्लेख है कि महुआबाग गांव के निवासी नागेंद्र राय इस मामले के प्रमुख गवाह हैं। उनके बयान के मुताबिक, जब-जब भोला यादव गांव आता था, पहले से सूचना दी जाती थी और गांव के लोग उसका इंतजार करते थे। भोला यादव का संदेश साफ होता था—जमीन लालू प्रसाद यादव या उनके परिवार के नाम ट्रांसफर कर दो, बदले में नौकरी मिलेगी। भूमि अधिग्रहण और नौकरी की खबरें सार्वजनिक होते ही भोला यादव का गांव आना बंद हो गया।
सीबीआई का कहना है कि जिन दो बिक्री विलेखों (किशुन देव राय और धर्मेंद्र राय) को रिकॉर्ड में लिया गया, उनसे जुड़े लोगों को नौकरी मिलना नागेंद्र राय के दावों की पुष्टि करता है। इससे भोला यादव द्वारा पद के दुरुपयोग और क्विड प्रो क्वो सौदे में उसकी संलिप्तता का गहरा संदेह उभरता है।
हार्ड डिस्क और एक्सेल शीट बना अहम सबूत
जांच में लालू यादव के कैंप कार्यालय से एक हार्ड डिस्क बरामद हुई, जिसमें सब्स्टीट्यूट नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों के नाम थे। इस संबंध में नेमत अली, जो उस समय कैंप कार्यालय में स्टेनोग्राफर था, ने बयान दिया कि भोला यादव उसी कंप्यूटर पर काम करता था और उसे आवेदकों के नाम, पिता का नाम और पते टाइप करने के निर्देश देता था। ये आवेदन रेलवे में ग्रुप-डी नियुक्तियों से जुड़े होते थे और रेल मंत्री या महाप्रबंधक को संबोधित किए जाते थे।
नेमत अली ने यह भी स्वीकार किया कि जिन नामों की सूची एमएस एक्सेल में थी, उन्हें उसने स्वयं टाइप किया था। सीबीआई का कहना है कि इससे साफ है कि आवेदन मंत्री के कार्यालय में तैयार हुए, OSD द्वारा प्रोसेस किए गए और जमीन बेचने वालों के पक्ष में नियुक्तियां कराई गईं।
कानूनी धाराएं और आरोप
अदालत ने भोला यादव के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार पाए हैं। सीबीआई के अनुसार, भोला यादव पर IPC की धारा 420, IPC 120B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(d)(ii)(iii) के तहत आरोप बनते हैं। जांच एजेंसी का निष्कर्ष है कि भोला यादव लालू प्रसाद यादव, अन्य अधिकारियों और मंत्री के परिवार के साथ साजिश में शामिल था, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा और अवैध लाभ सुनिश्चित किए गए।
कुल 103 नाम, 51 आरोपी
इस मामले में कुल 103 लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें लालू यादव और उनके परिवार सहित 51 आरोपी बनाए गए हैं। सीबीआई का कहना है कि भोला यादव इस पूरी साजिश की महत्वपूर्ण कड़ी था, जिसने मंत्री की कथित मंशा को जमीन पर उतारा।