
राजधानी भोपाल में सरकारी बंगलों को लेकर गंभीर स्थिति बन गई है। राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारी और नेता तबादला होने या पद पर न होने के बावजूद सरकारी आवासों का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। कई अधिकारियों ने फील्ड पोस्टिंग वाले जिलों में भी बंगला रख रखा है और भोपाल में भी कब्जा जमाए हुए हैं, जबकि नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि तबादले के छह महीने के भीतर आवास खाली करना अनिवार्य है।
संपदा संचालनालय ने इस नियमों की अनदेखी पर सख्ती दिखाई है। विभाग ने दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, राजगढ़ कलेक्टर महीप तेजस्वी, रत्नाकर झा समेत सात बड़े अधिकारियों और कुछ नेताओं को नोटिस जारी किया है। सुधीर कुमार कोचर दो साल पहले दमोह चले गए, फिर भी भोपाल का बंगला अब तक उनके पास है।
पूर्व मंत्री रामपाल सिंह चुनाव हारने के बाद भी शिवाजी नगर का बंगला खाली नहीं कर रहे हैं, वहीं दिवंगत भाजपा नेता प्रभात झा के परिजनों के पास भी आवास का कब्जा बरकरार है।
संपदा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नए आने वाले अधिकारियों के लिए आवास की भारी किल्लत हो रही है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर बंगलों को रिक्त नहीं किया गया, तो बल प्रयोग कर बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल में सरकारी बंगलों पर रसूखदारों के कब्जे के कारण नए अफसरों को आवास की तलाश में भटकना पड़ रहा है। संपदा संचालनालय की यह सख्ती मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप प्रशासन में कसावट लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।