
सर्दियों में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड (वॉटर हीटिंग रॉड) एक किफायती और आसान विकल्प मानी जाती है। यह हल्की, पोर्टेबल होती है और कम समय में पानी गर्म कर देती है। हालांकि, अगर रॉड खरीदते वक्त कुछ जरूरी बातों को नजरअंदाज किया जाए, तो यह बिजली के झटके और अन्य हादसों का कारण भी बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सही वॉट, सही मटीरियल और उचित सेफ्टी फीचर्स वाली रॉड चुनना बेहद जरूरी है।
क्या होती है इमर्शन रॉड?
इमर्शन रॉड एक पोर्टेबल इलेक्ट्रिक हीटिंग डिवाइस है, जिसे पानी से भरी बाल्टी या बर्तन में डुबोकर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें लगी मेटल कॉइल बिजली के संपर्क में आते ही गर्म होकर पानी को कुछ ही मिनटों में गर्म कर देती है। इसे कहीं भी ले जाना आसान है और गीजर की तरह इंस्टॉलेशन की जरूरत नहीं होती। छोटे परिवारों और अकेले रहने वालों के लिए यह एक उपयोगी विकल्प है।
कितने वॉट की रॉड है सही?
इमर्शन रॉड खरीदते समय सबसे अहम पहलू उसका वॉट होता है। आमतौर पर बाजार में 1000 वॉट से 2000 वॉट तक की रॉड उपलब्ध हैं।
- 1000 वॉट की रॉड छोटी बाल्टी या हल्के इस्तेमाल के लिए उपयुक्त होती है, जैसे बर्तन या कपड़े धोने के लिए पानी गर्म करना।
- 1500 से 2000 वॉट की रॉड बड़े बर्तन और नहाने के लिए पानी जल्दी गर्म करने के लिए बेहतर मानी जाती है, खासकर ज्यादा ठंड के मौसम में।
तांबा या स्टेनलेस स्टील – कौन बेहतर?
रॉड का मटीरियल उसकी परफॉर्मेंस और उम्र तय करता है।
- तांबे की रॉड पानी जल्दी गर्म करती है, लेकिन अगर उस पर सही कोटिंग न हो तो जंग लगने का खतरा रहता है।
- स्टेनलेस स्टील की रॉड ज्यादा टिकाऊ होती है और इसमें जंग नहीं लगती। विशेषज्ञ ऐसी रॉड लेने की सलाह देते हैं, जिन पर निकल या क्रोम की कोटिंग हो, जिससे स्केलिंग और जंग से बचाव हो सके।
सेफ्टी फीचर्स न हों तो खतरा
इमर्शन रॉड में सेफ्टी फीचर्स का होना बेहद जरूरी है। शॉकप्रूफ हैंडल, इंसुलेटेड वायर, मजबूत प्लग, पानी के स्तर का निशान और ऑटो कट-ऑफ जैसे फीचर्स करंट और ओवरहीटिंग से बचाते हैं। बिना सेफ्टी फीचर्स वाली सस्ती रॉड जानलेवा साबित हो सकती है।
निष्कर्ष:
इमर्शन रॉड भले ही सस्ती और सुविधाजनक हो, लेकिन खरीदते समय थोड़ी सावधानी जरूरी है। सही वॉट, अच्छी कोटिंग और जरूरी सेफ्टी फीचर्स वाली रॉड चुनकर न सिर्फ बिजली की बचत की जा सकती है, बल्कि हादसों से भी बचा जा सकता है।
