Saturday, January 31

नोटिस देकर भी छोड़ा जा सकता था, जेल से बाहर आए वकील अनिल मिश्रा, हाई कोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार

 

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ग्वालियर (आकाश सिकरवार): मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने डॉ. भीमराव अंबेडकर का पोस्टर जलाने के आरोप में गिरफ्तार एडवोकेट अनिल मिश्रा को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए कहा कि पुलिस उन्हें नोटिस देकर भी छोड़ सकती थी, लेकिन प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां पाई गईं।

 

कोर्ट के आदेश के बाद अनिल मिश्रा को एक लाख रुपए के निजी मुचलके और एक लाख रुपए की जमानत राशि पर रिहा कर दिया गया। इस मामले में ग्वालियर साइबर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर अनिल मिश्रा सहित आठ लोगों को आरोपी बनाया था। हाई कोर्ट के फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य आरोपी भी निचली अदालत से जमानत प्राप्त कर सकते हैं।

 

कोर्ट ने आदेश में इस मामले से जुड़े जुलूस और अन्य गतिविधियों पर रोक भी लगा दी। बुधवार रात करीब 8 बजे अनिल मिश्रा को उनके तीन अन्य साथियों के साथ केंद्रीय जेल से रिहा किया गया। जेल के बाहर बड़ी संख्या में उनके समर्थक और वकील मौजूद थे। रिहाई के बाद अनिल मिश्रा सीधे अपने साथियों के साथ कार से घर के लिए रवाना हो गए और मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।

 

इस घटना के बाद ग्वालियर में 2 जनवरी को भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी और अन्य दलित संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर करीब ढाई घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने एफआईआर को अपर्याप्त बताते हुए मुख्य आरोपी अनिल मिश्रा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लागू करने की मांग की थी।

 

अंबेडकर पोस्टर विवाद मामले में हाई कोर्ट में सोमवार को सुबह 10:30 बजे से शाम 5 बजे तक लंबी सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता, पीड़ित और राज्य सरकार तीनों पक्षों की दलीलें सुनीं और जांच एजेंसी के आचरण पर नाराजगी जताई। जस्टिस अहलुवालिया ने एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामलों में पीड़ित को सुनवाई का पूरा अधिकार देने पर भी जोर दिया।

 

 

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