
गुवाहाटी। विधानसभा चुनावों से पहले असम की भाजपा सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान (एमएमयूए) को तेज कर दिया है। राज्य के सभी 35 जिलों में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को 10 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से 40 लाख महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि एक अप्रैल 2025 से शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक 15 लाख से अधिक महिलाओं को 10 हजार रुपये की प्रारंभिक सहायता दी जा चुकी है। पहले बजट में योजना का लक्ष्य 32 लाख महिलाओं तक सीमित था, जिसे बढ़ाकर 40 लाख कर दिया गया है।
8 लाख महिलाएं बन चुकी हैं ‘लखपति दीदी’
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एमएमयूए योजना के तहत अब तक करीब 8 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ का दर्जा हासिल कर चुकी हैं। इससे न केवल उनके परिवारों की आय में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
चरणबद्ध सहायता का प्रावधान
इस योजना के तहत महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से आर्थिक सहायता दी जा रही है।
पहली किश्त: 10,000 रुपये की प्रारंभिक पूंजी
दूसरी किश्त: पूंजी का सही उपयोग करने पर 25,000 रुपये का कम ब्याज दर पर ऋण
तीसरी किश्त: सफल उद्यम स्थापित करने पर 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त सहायता
27 हजार से अधिक महिलाओं को मिला लाभ
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि सरुपाथर के बाद बोकाखाट में 27 हजार से अधिक महिलाओं को एमएमयूए योजना के तहत 10 हजार रुपये की सहायता दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार नारी शक्ति को सशक्त बनाने और उनके सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आत्मनिर्भर असम की ओर कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएमयूए योजना से असम को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी और कई क्षेत्रों में दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी। 40 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य राज्य की अर्थव्यवस्था को नया बल देगा।