Thursday, January 8

नीतीश के भरोसेमंद, मोदी की पसंद बने रामनाथ ठाकुर जदयू–भाजपा दोनों के लिए ‘हॉट केक’, संगठनात्मक बदलाव की आहट

 

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पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता होने के बावजूद वे अब भाजपा और जदयू—दोनों ही दलों के लिए खास बनते जा रहे हैं। यही वजह है कि जदयू में संभावित संगठनात्मक बदलाव को लेकर जहां पार्टी के भीतर हलचल तेज है, वहीं भाजपा खेमे में भी इसे लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।

 

सूत्रों के मुताबिक जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा है। ऐसे में उनके स्थान पर केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को जदयू की प्रदेश कमान सौंपे जाने की संभावनाएं प्रबल होती जा रही हैं। माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के बाद जदयू संगठन में बड़े फेरबदल हो सकते हैं।

 

जदयू को विश्वसनीय चेहरे की तलाश

 

जदयू सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व संगठन की बागडोर किसी ऐसे नेता को सौंपना चाहता है, जो भरोसेमंद होने के साथ-साथ अति पिछड़ा वर्ग में मजबूत पकड़ रखता हो। इस कसौटी पर रामनाथ ठाकुर सबसे आगे माने जा रहे हैं। हालांकि आरसीपी सिंह का नाम भी चर्चा में है, लेकिन माना जा रहा है कि वे संगठनात्मक पद लेने के बजाय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की राजनीतिक भूमिका को मजबूत करने में जुट सकते हैं।

 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में अति पिछड़ा वोट बैंक को साधने की रणनीति के तहत रामनाथ ठाकुर को आगे बढ़ाया जा रहा है। जननायक कर्पूरी ठाकुर से उनका जुड़ाव और उनकी विरासत उन्हें इस वर्ग में स्वाभाविक बढ़त दिलाता है।

 

भाजपा की ‘गुड बुक’ में भी रामनाथ

 

केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी पसंद माने जाते हैं। भाजपा के रणनीतिकार उन्हें नीतीश कुमार के बाद अति पिछड़ों का सबसे बड़ा प्रतिनिधि मानते हैं। हालांकि भाजपा उन्हें तोड़ने के पक्ष में नहीं है, लेकिन उनके माध्यम से जदयू पर अपना अप्रत्यक्ष प्रभाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

 

भाजपा के भीतर कई मौकों पर रामनाथ ठाकुर का नाम बड़े संवैधानिक पदों के लिए भी उछला है। उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी वे भाजपा की पसंद के रूप में चर्चा में रहे थे।

 

उपराष्ट्रपति चुनाव से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक चर्चा

 

जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई, तब भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और रामनाथ ठाकुर की मुलाकात ने राजनीतिक सरगर्मी और तेज कर दी थी। इसके बाद उन्हें उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जाने लगा।

 

समस्तीपुर से बदली चुनावी धार

 

रामनाथ ठाकुर के राजनीतिक कद का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दरभंगा की प्रस्तावित जनसभा रद्द कर समस्तीपुर से संबोधन किया। इस दौरान पीएम मोदी सबसे पहले जननायक कर्पूरी ठाकुर के आवास पहुंचे, परिवारजनों से मुलाकात की और फिर विशाल जनसभा को संबोधित किया।

 

सभा में प्रधानमंत्री ने आरजेडी–कांग्रेस गठबंधन पर तीखा हमला करते हुए एनडीए की वापसी का दावा किया और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने का श्रेय अपनी सरकार को दिया। इसे बिहार की चुनावी राजनीति में अति पिछड़ा वर्ग को साधने की बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

 

 

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