Sunday, February 1

भारत की वायु रक्षा को मिलेगी नई ताकत, S-400 के लिए ‘स्टील्थ किलर’ येनिसेई रडार की पेशकश कर सकता है रूस

मॉस्को/नई दिल्ली।
भारत की वायु सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में रूस एक अहम प्रस्ताव दे सकता है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, रूस भारत को अपने अत्याधुनिक 98L6E ‘येनिसेई’ (Yenisei) AESA मल्टीमोड फायरकंट्रोल रडार सिस्टम की पेशकश करने पर विचार कर रहा है। इस रडार को भारतीय वायुसेना के S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम के साथ इंटीग्रेट किया जा सकता है, जिससे भारत की लेयर्ड एयर डिफेंस क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।

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विशेषज्ञों का कहना है कि येनिसेई रडार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह स्टील्थ फाइटर जेट्स को भी ट्रैक करने में सक्षम है। इसमें अमेरिका का F-35 लाइटनिंग-II, चीन का J-20 और भविष्य में पाकिस्तान के लिए संभावित चीनी J-35A जैसे अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर शामिल हैं। ऐसे में यह प्रणाली भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

400 किलोमीटर तक निगरानी, जैमिंग से भी बेअसर
98L6E येनिसेई रडार की रेंज करीब 400 किलोमीटर बताई जा रही है। इसमें एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक काउंटरकाउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता मौजूद है, जिससे यह भारी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जैमिंग के माहौल में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। रक्षा जानकारों के मुताबिक, इस रडार के शामिल होने से भारत की मौजूदा S-400 रेजीमेंट्स की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

गौरतलब है कि S-400 सिस्टम की ताकत दुनिया पहले ही देख चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने लगभग 314 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तान के एक AWACS विमान को सफलतापूर्वक मार गिराया था, जिसे भारत की वायु रक्षा क्षमता का बड़ा प्रदर्शन माना गया।

स्टील्थ तकनीक पर भारी पड़ेगा मल्टीबैंड AESA
98L6E येनिसेई एक AESA (Active Electronically Scanned Array) आधारित रडार है, जो मल्टी-बैंड और मल्टी-फ्रीक्वेंसी ऑपरेशन में सक्षम है। आमतौर पर स्टील्थ फाइटर जेट्स को X-बैंड रडार से बचने के लिए डिजाइन किया जाता है, लेकिन येनिसेई की मल्टीस्पेक्ट्रम क्षमता कम रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) वाले लक्ष्यों को भी पहचानने और ट्रैक करने में सक्षम बनाती है।

यदि इसे S-400 के मौजूदा सेंसर नेटवर्क से जोड़ा जाता है, तो यह पहले से कहीं ज्यादा दूरी और सटीकता के साथ हवाई खतरों की पहचान कर सकेगा। इससे लक्ष्य की जल्दी पहचान संभव होगी और इंटरसेप्टर मिसाइलों को समय रहते लॉन्च किया जा सकेगा।

भारत को होंगे कई रणनीतिक फायदे
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, येनिसेई रडार के शामिल होने से भारत को कई अहम लाभ मिलेंगे—

  • स्टील्थ फाइटर जेट्स की पहले और दूर से पहचान
  • S-400 सिस्टम की मारक क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
  • इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जैमिंग के दौरान भी प्रभावी संचालन।
  • लो-RCS टारगेट्स की बेहतर ट्रैकिंग।
  • लेयर्ड एयर डिफेंस में उन्नत सेंसर क्यूइंग और नेटवर्किंग।
  • चीन और पाकिस्तान से जुड़े स्टील्थ खतरों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा।

चीनपाकिस्तान चुनौती के बीच अहम प्रस्ताव
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आ रहा है, जब चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास अपने J-20 स्टील्थ फाइटर जेट्स की तैनाती बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। वहीं, पाकिस्तान भी भविष्य में चीनी स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने की संभावना तलाश रहा है। ऐसे परिदृश्य में रूस का यह ऑफर भारत की सुरक्षा रणनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर येनिसेई रडार को S-400 के साथ सफलतापूर्वक इंटीग्रेट किया जाता है, तो भारत की वायु रक्षा प्रणाली एक मजबूत किले में तब्दील हो जाएगी—जहां अलग-अलग रडार बैंड, सेंसर और इंटरसेप्टर मिसाइल एक साथ मिलकर किसी भी हवाई खतरे का प्रभावी जवाब देने में सक्षम होंगे।

 

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