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NET JRF या SRF: रिसर्च करियर में कौन सा विकल्प चुनें? स्टाइपेंड, रिसर्च टाइम और जिम्मेदारियों का पूरा हिसाब

 

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नई दिल्ली, 3 जनवरी 2026: भारत में रिसर्च और एकेडमिक फील्ड में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए UGC NET JRF और SRF अहम भूमिका निभाते हैं। जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) और सीनियर रिसर्च फेलोशिप (SRF) दोनों ही स्टाइपेंड और फुल-टाइम रिसर्च के अवसर देती हैं, लेकिन इनके बीच योग्यता, रिसर्च अवधि और स्टाइपेंड में महत्वपूर्ण अंतर है।

 

NET JRF क्या है?

JRF यानी जूनियर रिसर्च फेलोशिप मुख्य रूप से नए पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए होती है। इसे NET परीक्षा के माध्यम से दिया जाता है और यह फुल-टाइम रिसर्च या PhD करने वाले छात्रों को फाइनेंशियल सपोर्ट देती है। JRF स्टार्टिंग रिसर्चर्स के लिए होती है और भारत में यूनिवर्सिटी टीचिंग पोस्ट के लिए भी इसे एलिजिबिलिटी माना जाता है।

 

NET SRF क्या है?

SRF यानी सीनियर रिसर्च फेलोशिप उन छात्रों के लिए है जिन्होंने JRF की दो साल की अवधि पूरी कर ली है या जरूरी क्राइटेरिया पूरा किया है। यह एडवांस रिसर्चर्स के लिए है और ज्यादा स्टाइपेंड और रिसर्च जिम्मेदारियों के साथ PhD प्रोजेक्ट्स में निरंतरता और एकेडमिक ग्रोथ का अवसर देती है।

 

JRF और SRF में मुख्य अंतर:

 

योग्यता: JRF नए पोस्टग्रेजुएट्स के लिए, SRF एडवांस रिसर्चर्स के लिए।

स्टाइपेंड: JRF में 2 साल के लिए लगभग ₹37,000/माह, SRF में 3 साल तक ₹42,000/माह।

रिसर्च टाइम: JRF 2 साल की फेलोशिप, SRF 3 साल तक एडवांस रिसर्च स्टेज सपोर्ट।

जिम्मेदारियाँ: SRF में रिसर्च प्रोजेक्ट्स में ज्यादा जिम्मेदारियाँ और एकेडमिक रोल।

 

कौन सा चुनें?

 

नए पोस्टग्रेजुएट्स JRF चुन सकते हैं।

जिन छात्रों के पास पहले से रिसर्च का अनुभव है या जो प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुके हैं, उन्हें SRF में अधिक लाभ मिलेगा।

 

फैसला करने से पहले स्टाइपेंड, रिसर्च टाइम और भविष्य में एकेडमिक जॉब्स के अवसर जरूर देखें। अधिक जानकारी और आधिकारिक डिटेल्स के लिए UGC NET की वेबसाइट चेक करना जरूरी है।

 

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