Thursday, January 1

नई कॉस्ट डाटा बुक 2025: बिजली कनेक्शन अब होगा सस्ता और आसान स्मार्ट मीटर की कीमत में बड़ी कटौती, अविकसित कॉलोनियों को राहत

 

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने नए साल से पहले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। आयोग ने नई कॉस्ट डाटा बुक–2025 को मंजूरी दी है, जो अगले दो वर्षों तक लागू रहेगी। इसके तहत प्रदेश में बिजली कनेक्शन लेना पहले की तुलना में सस्ता, पारदर्शी और सरल हो जाएगा। विशेष लाभ अविकसित और गैर-विद्युतीकृत कॉलोनियों के निवासियों को मिलेगा।

 

कॉस्ट डाटा बुक क्या है?

 

कॉस्ट डाटा बुक में बिजली उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित शुल्कों का विवरण होता है। इसमें शामिल हैं:

 

बिजली प्रोसेसिंग फीस

सुरक्षा जमा (Security Deposit)

सप्लाई अफोर्डिंग चार्ज

सामग्री लागत

स्मार्ट मीटर लागत

 

यूपी विद्युत नियामक आयोग ने इस बार 6 साल बाद रिवाइज्ड डाटा बुक जारी की है।

 

अविकसित कॉलोनियों को राहत

 

नई व्यवस्था के अनुसार, अब अविकसित कॉलोनियों के निवासी केवल मीटरिंग शुल्क का भुगतान करेंगे। पहले ली जाने वाली अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर लागत अब नहीं ली जाएगी। बहुमंजिला भवनों में मल्टी-पॉइंट कनेक्शन के लिए भी समान नियम लागू होंगे।

 

स्मार्ट मीटर अब सस्ते

 

नई कॉस्ट डाटा बुक 2025 के अनुसार:

 

सिंगल फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर – ₹2,800 (पहले ₹6,016)

थ्री फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर – ₹4,100 (पहले ₹11,342)

 

गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले उपभोक्ताओं को 24 किस्तों में भुगतान की सुविधा भी मिलेगी।

 

ट्रांसफॉर्मर और पोल के भुगतान में भी राहत

 

अब कनेक्शन दूरी को तीन स्लैब में बांटा गया है:

 

100 मीटर तक

101–300 मीटर

301 मीटर से अधिक

 

300 मीटर तक के भवनों में 150 किलोवॉट तक का कनेक्शन एक तय राशि पर मिलेगा। इसके अलावा, एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (AMI) की लागत नए उपभोक्ताओं से नहीं ली जाएगी।

 

उपभोक्ताओं पर असर

 

उदाहरण के लिए, 2 किलोवॉट का घरेलू उपभोक्ता अगर 100 मीटर की दूरी तक कनेक्शन लेना चाहता है, तो उसे केवल ₹5,500 देना होगा। 300 मीटर की दूरी तक कनेक्शन लेने पर ₹7,555 का भुगतान करना होगा। इससे उपभोक्ताओं को भारी-भरकम खर्च से राहत मिलेगी और बिजली कनेक्शन प्रक्रिया सुलभ और पारदर्शी बनेगी।

 

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि अब बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं से 100 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त वसूली लौटानी पड़ेगी।

 

 

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