Monday, January 26

स्कूली शिक्षा में 2026 से बड़े बदलाव: AI की पढ़ाई, दो बार बोर्ड एग्जाम और फेल छात्रों के लिए नए विकल्प

 

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शिक्षा मंत्रालय ने 2026 से स्कूली शिक्षा में कई बड़े बदलावों की शुरुआत कर दी है। इनमें फेल होने वाले छात्रों के लिए नई योजनाएं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई और बोर्ड एग्जाम में दोबारा अवसर जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

 

ऑटोमेटेड स्टूडेंट ट्रैकिंग

 

शिक्षा मंत्रालय ने ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (APAAR) आईडी शुरू की है। अब तक लगभग 25 करोड़ छात्रों की आईडी बन चुकी है। इस आईडी के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि 10वीं की परीक्षा देने वाले कितने छात्र 11वीं में दाखिला नहीं ले रहे। फेल स्टूडेंट्स और ड्रॉपआउट छात्रों की पहचान कर उनके लिए ओपन स्कूलिंग व अन्य विकल्प उपलब्ध करवाए जाएंगे।

 

फेल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका

 

2026 से 10वीं में दो बार बोर्ड एग्जाम पॉलिसी लागू की जा रही है। इसका मतलब है कि अगर कोई छात्र पहली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता, तो उसे दूसरा मौका मिलेगा। इससे छात्रों पर दबाव कम होगा और उनकी पढ़ाई की निरंतरता बनी रहेगी।

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का करिकुलम

 

अप्रैल 2026 से नए शैक्षणिक सत्र में तीसरी क्लास से ही छात्रों को AI की पढ़ाई शुरू कराई जाएगी। इसके लिए नई किताबें और सिलेबस तैयार किए जा रहे हैं। AI की टेक्स्टबुक्स राष्ट्रीय करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE) के आधार पर बनाई जाएंगी। 11वीं और 12वीं के लिए AI का सिलेबस IIT प्रोफेसर और बड़े कॉर्पोरेट अधिकारियों की टीम तय करेगी।

 

ओपन स्कूलिंग और गाइडेंस

 

फेल होने वाले छात्रों को उनके ब्लॉक के स्कूलों में गाइडेंस दी जाएगी। NIOS के माध्यम से पढ़ाई का विकल्प उपलब्ध होगा। ओपन स्कूलिंग के जरिए छात्र अपनी 12वीं तक की पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। रेगुलर और ओपन स्कूलिंग की सर्टिफिकेट वैल्यू समान होगी।

 

शिक्षक प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा

 

एनसीईआरटी ‘डीम्ड टू बी’ विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद यूनिक टीचर एजुकेशन प्रोग्राम विकसित कर रहा है। इसमें पोस्ट ग्रेजुएट और डॉक्टोरल स्तर के कार्यक्रम शामिल होंगे। इसके अलावा, ग्रैजुएशन स्तर पर फोर ईयर इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) भी ऑफ-कैंपस चलाया जाएगा।

 

ड्रॉपआउट रेट और नामांकन

 

प्रारंभिक शिक्षा में सकल नामांकन लगभग 100% के करीब है, जबकि 12वीं तक यह घटकर 58% रह जाता है। शिक्षा मंत्रालय का लक्ष्य है कि 2030 तक सेकेंडरी व हायर सेकेंडरी में जीईआर 100% हो। ओपन स्कूलिंग और ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

निष्कर्ष:

2026 से स्कूली शिक्षा में छात्रों की पढ़ाई को आसान, आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। AI की पढ़ाई, बोर्ड एग्जाम में दोबारा अवसर और फेल छात्रों के लिए ट्रैकिंग जैसी योजनाओं से शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों का भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।

 

 

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