
मुंबई: केंद्र सरकार द्वारा महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण देने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई और सरकार से सवाल किया कि कोश्यारी ने ऐसा क्या कार्य किया है, जिसके लिए उन्हें यह उच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया गया।
संजय राउत का हमला
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता संजय राउत ने इस सम्मान को ‘लोकतंत्र और संविधान की हत्या’ करार दिया। उन्होंने कहा कि कोश्यारी ने छत्रपति शिवाजी महाराज और महात्मा फुले जैसे राष्ट्रीय नायकों का अपमान किया। राउत ने आरोप लगाया कि ऐसे व्यक्ति को सम्मानित करना मराठी लोगों के स्वाभिमान पर नमक छिड़कने के समान है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि लोकतंत्र और संविधान की हत्या करने के लिए सम्मान दिया जा रहा है, तो वे ऐसी सरकार को नमन करते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी इस सम्मान पर आश्चर्य व्यक्त किया और पूछा कि कोश्यारी को यह पद्म भूषण किस विशेष योगदान के लिए मिला। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता मुकुंद किर्दत ने कहा कि ऐसे विवादास्पद व्यक्तित्व को सम्मानित करके सरकार ने नागरिक सम्मान की गरिमा को कम किया है।
कोश्यारी के भड़काऊ बयान का इतिहास
विवाद जुलाई 2022 में शुरू हुआ जब कोश्यारी ने कहा था कि यदि मुंबई से गुजराती और राजस्थानी चले गए तो शहर में कोई पैसा नहीं बचेगा। इस बयान पर विरोध प्रदर्शन हुए थे और बाद में कोश्यारी ने इसे वापस लेते हुए कहा था कि उनका उद्देश्य मराठी लोगों को नीचा दिखाना नहीं था।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का नजरिया
सामाजिक कार्यकर्ता मानव कांबले ने कहा कि बीजेपी के पास कोई नया नायक नहीं होने के कारण ऐसे व्यक्तियों को नायक बनाकर मनमाने रवैये का संदेश दिया जा रहा है।
इस विवाद ने महाराष्ट्र में राजनीतिक और सामाजिक बहस को नई दिशा दे दी है, जबकि पद्म भूषण मिलने की घोषणा ने भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष के आक्रोश को बढ़ा दिया है।