Tuesday, January 27

‘जिंदगी नर्क जैसी हो गई…’ जर्मनी में भारतीय छात्रों के साथ बड़ा धोखा, यूनिवर्सिटी के फ्रॉड से भविष्य अधर में

 

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बर्लिन/नई दिल्ली। विदेश में बेहतर भविष्य का सपना लेकर जर्मनी पहुंचे सैकड़ों भारतीय छात्रों की जिंदगी इन दिनों संकट में है। जर्मनी की राजधानी बर्लिन स्थित इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (IU) में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों पर अब डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है। वजह—यूनिवर्सिटी की मान्यता और पढ़ाई के तरीके पर सवाल, जिसने छात्रों की डिग्री ही नहीं, उनका वीजा स्टेटस भी खतरे में डाल दिया है।

 

एक भारतीय छात्र ने अपनी पीड़ा बयान करते हुए कहा,

“मेरी जिंदगी नर्क जैसी लग रही है। पढ़ाई करने आया था, अब जर्मन अधिकारियों के चक्कर काट रहा हूं।”

 

20 हजार यूरो खर्च, अब डिपोर्टेशन का डर

 

महाराष्ट्र के रहने वाले 25 वर्षीय दीप शंबरकर जुलाई 2025 में बिजनेस मैनेजमेंट में मास्टर्स करने बर्लिन पहुंचे थे। उन्होंने IU में एडमिशन के लिए करीब 20 हजार यूरो खर्च किए और एजुकेशन लोन भी लिया। अब उन्हें बर्लिन इमिग्रेशन ऑफिस (LEA) की ओर से नोटिस मिला है, जिसमें कहा गया है कि यदि वे 3 नवंबर तक जर्मनी नहीं छोड़ते, तो उन्हें जबरन डिपोर्ट किया जा सकता है।

 

दीप के मुताबिक,

“यूनिवर्सिटी के कोर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर मान्यता पर सवाल उठे हैं। कहा जा रहा है कि यहां न पर्याप्त प्रोफेसर हैं और न ही ठीक से कैंपस।”

 

दीप ने फैसले के खिलाफ अपील की है, लेकिन उन्हें राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम लग रही है।

 

‘अच्छा हुआ वीजा नहीं मिला’

 

अपग्रेड एजेंसी के जरिए एडमिशन लेने वाले तनिष्क ने दिल्ली में ही बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन का पहला साल पूरा कर लिया था। सितंबर में उन्हें बर्लिन जाना था, लेकिन वीजा नहीं मिला।

तनिष्क कहते हैं,

“अब लगता है कि वीजा न मिलना ही अच्छा रहा। नहीं तो मैं भी डिपोर्ट हो जाता। भारत में कम से कम परिवार का सहारा है।”

 

किराए के फ्लोर में चल रही यूनिवर्सिटी!

 

छात्रों का दावा है कि IU का बर्लिन कैंपस किसी यूनिवर्सिटी से ज्यादा ऑफिस स्पेस जैसा है। फ्रैंकफर्टर एले इलाके में एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के भीतर, ऑप्टिशियन और सुपरमार्केट के बीच यूनिवर्सिटी चल रही है। करीब 11,700 वर्ग मीटर जगह होटल से किराए पर ली गई है।

 

दीप कहते हैं,

“मुझे कभी महसूस ही नहीं हुआ कि मैं किसी असली यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा हूं। मैंने सही कोर्स चुना, लेकिन गलत यूनिवर्सिटी।”

 

अपराधियों जैसा व्यवहार, मानसिक तनाव चरम पर

 

छात्रों का आरोप है कि उनसे अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी से संपर्क करना मुश्किल है, हालांकि अब IU ने कुछ छात्रों के लिए वकीलों की फीस देने की बात कही है।

 

एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,

“मैं खुद को असफल महसूस करता हूं। भूख नहीं लगती, नींद नहीं आती। लगता है जिंदगी खत्म हो जाएगी।”

 

कैसे हुआ यह पूरा विवाद?

 

विवाद की जड़ है यूनिवर्सिटी का हाइब्रिड स्टडी मॉडल। छात्रों को भरोसा दिलाया गया कि

 

पहला सेमेस्टर भारत से ऑनलाइन

बाद की पढ़ाई जर्मनी के कैंपस में होगी

 

लेकिन जर्मन कानून (रेजिडेंट एक्ट सेक्शन 16b) के तहत स्टूडेंट वीजा सिर्फ फुल-टाइम कैंपस स्टडी के लिए दिया जाता है। जांच में सामने आया कि कोर्स का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन/रिमोट था। ऐसे में अधिकारियों ने माना कि छात्र वास्तव में कैंपस स्टडी के लिए जर्मनी आए ही नहीं थे।

 

इसी आधार पर अब छात्रों से कहा जा रहा है कि वे देश छोड़ दें, वरना डिपोर्टेशन तय है।

 

300 से ज्यादा छात्र लौट चुके

 

छात्रों के मुताबिक, मार्च 2025 से अब तक 300 से ज्यादा छात्र जर्मनी छोड़ चुके हैं। जिनके पास पैसे थे, उन्होंने यूनिवर्सिटी बदल ली, बाकी मजबूरी में वापस लौट गए।

 

इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में कुल 1.30 लाख छात्र पढ़ते हैं, जिनमें करीब 4500 भारतीय शामिल हैं। यह मामला जर्मनी में पढ़ाई का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए बड़ा चेतावनी संकेत बनकर सामने आया है।

 

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