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पढ़ाई की दीवानगी पर हाईकोर्ट भी हुआ प्रभावित — IAS बनने के लिए घर से भागी नाबालिग को मिलेगा प्रशासनिक सहारा

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है जिसने न सिर्फ अदालत को बल्कि समाज को भी झकझोर दिया है। सिर्फ साढ़े 17 साल की एक युवती, जिसने IAS अधिकारी बनने का सपना देखा, अपने घर में पढ़ाई के माहौल और पिता के शादी के दबाव के कारण घर छोड़कर इंदौर चली गई
अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस बहादुर लड़की के सपनों को पंख देने का फैसला किया है। अदालत ने कहा है कि अगर घर में पढ़ाई का माहौल नहीं मिलता, तो प्रशासन उसकी पढ़ाई और रहने की व्यवस्था करेगा।

🩵 पिता के विरोध के बीच साढ़े 17 साल की उम्र में लिया साहसिक फैसला

यह मामला भोपाल के बजरिया इलाके का है। युवती ने आरोप लगाया कि उसके पिता न तो उसे आगे पढ़ने दे रहे थे और न ही नौकरी करने की इजाजत। उल्टा उस पर कम उम्र में शादी का दबाव डाला जा रहा था।
पढ़ाई और करियर को लेकर गंभीर युवती ने जनवरी 2025 में घर छोड़ दिया और इंदौर पहुंच गई। वहां उसने एक निजी कंपनी में नौकरी शुरू की और UPSC की तैयारी के लिए कोचिंग जॉइन कर ली।

🕵️‍♀️ 10 महीने बाद पुलिस ने इंदौर से किया बरामद

परिवार ने बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन महीनों तक कोई सुराग नहीं मिला।
आखिरकार, जबलपुर हाईकोर्ट में पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के बाद पुलिस ने उसकी खोज शुरू की।
कुछ महीने पहले युवती ने आधार कार्ड में मोबाइल नंबर अपडेट कराया, जिससे उसकी लोकेशन का पता चला।
पुलिस ने इंदौर से उसे बरामद कर भोपाल पहुंचाया।

👨‍👩‍👧 घर लौटने से किया इनकार – बोली “मैं IAS बनना चाहती हूं”

पुलिस जब युवती को परिवार से मिलाने ले गई, तो उसने साफ कहा कि वह पिता के साथ नहीं रहना चाहती
उसने बताया कि घर में उसे न पढ़ाई का माहौल मिला, न सपनों का सम्मान।
वह अपनी मेहनत और लगन से IAS बनना चाहती है और इसके लिए संघर्ष करने को तैयार है।

गौरतलब है कि युवती के घर से भागने के बाद पिता अपने तीन अन्य बच्चों की भी पढ़ाई छुड़वाकर बिहार लौट गए थे।

⚖️ हाईकोर्ट ने दिखाई संवेदनशीलता – कहा, “सपनों को उड़ान दी जाएगी”

5 नवंबर को युवती को जबलपुर हाईकोर्ट में पेश किया गया।
मुख्य न्यायाधीश संजय सचदेवा और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की बेंच ने दोनों पक्षों की बात सुनी।
लड़की ने कहा कि वह पिता के साथ नहीं जाना चाहती क्योंकि वहां पढ़ाई असंभव है।
पिता ने अदालत से वादा किया कि वह उसे अब परेशान नहीं करेंगे।

अदालत ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि युवती कुछ दिन अभिभावक के साथ रहकर देखे,
अगर माहौल ठीक न लगे, तो कलेक्टर को आदेश दिया जाएगा कि उसकी शिक्षा और आवास की जिम्मेदारी प्रशासन संभाले।

📅 12 नवंबर को अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को तय की है, जिसमें युवती के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय होगा।
फिलहाल, अदालत के इस फैसले से यह संदेश गया है कि “जो लड़कियां पढ़ाई और करियर के लिए संघर्ष कर रही हैं, उन्हें अब सिस्टम भी सपोर्ट करेगा।”

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