Monday, January 12

नांदेड़ में भाजपा को बड़ा झटका: एक ही परिवार के 6 प्रत्याशी हारे, अजित पवार की NCP ने मारी बाज़ी

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में मजबूत स्थिति के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को नांदेड़ जिले के लोहा नगर परिषद में करारा झटका लगा है। यहां भाजपा द्वारा एक ही परिवार के छह सदस्यों को टिकट देने का फैसला पार्टी पर भारी पड़ गया। चुनाव नतीजों में इस परिवार के सभी छह प्रत्याशी हार गए, जबकि अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने शानदार जीत दर्ज की।

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लोहा नगर परिषद में भाजपा ने प्रभावशाली नेता गजानन सूर्यवंशी को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था। उनके साथ उनकी पत्नी गोदावरी सूर्यवंशी, भाई सचिन सूर्यवंशी, भाभी सुप्रिया सूर्यवंशी, बहनोई युवराज वाघमारे और भतीजे की पत्नी रीना व्यावहारे को भी मैदान में उतारा गया। हालांकि, जनता ने इस वंशवादी प्रयोग को नकारते हुए सभी प्रत्याशियों को चुनाव में पराजित कर दिया। अध्यक्ष पद पर एनसीपी (अजित पवार) के उम्मीदवार शरद पवार ने गजानन सूर्यवंशी को शिकस्त दी।

टिकट वितरण पर पहले से थी आलोचना

निकाय चुनाव से पहले ही भाजपा के इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। विपक्षी महा विकास अघाड़ी ही नहीं, बल्कि महायुति की सहयोगी एनसीपी (अजित पवार) ने भी एक ही परिवार को छह टिकट देने पर सवाल उठाए थे। भाजपा के भीतर भी इस निर्णय को लेकर असंतोष था, लेकिन इसके बावजूद टिकट वापस नहीं लिए गए।

NCP का तीखा कटाक्ष

एनसीपी नेता प्रतापराव गोविंदराव चिखालिकर ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को क्षेत्र में योग्य उम्मीदवार नहीं मिले, इसलिए एक ही परिवार के लोगों को मैदान में उतारना पड़ा। विपक्ष ने इसे भाजपा की “वंशवादी राजनीति” का उदाहरण बताया।

नांदेड़ जिले का चुनावी गणित

नांदेड़ जिले में एनसीपी (अजित पवार) ने लोहा, कंधार, देगलूर और उमरी नगर परिषदों में जीत दर्ज की। वहीं भाजपा ने कुंडलवाड़ी, मुदखेड़ और भोकर नगर परिषदों पर कब्जा जमाया।
शिवसेना और मराठवाड़ा जनहित पार्टी ने दो-दो नगर परिषदों में जीत हासिल की, जबकि शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस को एक-एक नगर परिषद में सफलता मिली। खास बात यह रही कि एनसीपी (शरद पवार) जिले में एक भी सीट नहीं जीत सकी।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के भाजपा में शामिल होने के बाद नांदेड़ में पार्टी के प्रदर्शन पर खास नजर थी, लेकिन लोहा नगर परिषद के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि वंशवाद और टिकट वितरण की रणनीति जनता को रास नहीं आई

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