Wednesday, February 4

2025 में संसद ने पारित किए कई अहम और विवादित कानून, वक्फ, रोजगार, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े बिल प्रमुख

नई दिल्ली: साल 2025 में संसद की कार्यवाही में कई महत्वपूर्ण और विवादास्पद कानून पारित हुए। इनमें वक्फ कानून, रोजगार, ऊर्जा, खेल, श्रम, कर और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े बड़े सुधार शामिल हैं।

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VB-G RAM G बिल को मंजूरी:
संसद के शीतकालीन सत्र में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G बिल को मंजूरी दी गई। मनरेगा के नए रूप में इस योजना में सालाना गारंटीकृत रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं। अब यह पूरी तरह मांग आधारित योजना नहीं रहेगी और केंद्र सरकार तथा राज्यों के बीच खर्च साझा किया जाएगा।

SHANTI बिल 2025 पारित:
यह कानून पुराने परमाणु ऊर्जा नियमों की जगह लेगा। इसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना और नवाचार को प्रोत्साहित करना है। साथ ही, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड को कानूनी दर्जा दिया गया है।

राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025:
इस कानून से देश में खेल प्रशासन में बड़े बदलाव की उम्मीद है। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों का कल्याण, खेलों का विकास और खेल संगठनों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम 2025:
संसद ने ऑनलाइन गेमिंग के प्रचार और विनियमन अधिनियम भी पास किया। यह कानून मनी गेम्स से होने वाली लत, आर्थिक नुकसान और सामाजिक समस्याओं पर रोक लगाएगा और सुरक्षित गेमिंग को बढ़ावा देगा।

चार श्रम संहिताएं लागू:
21 नवंबर 2025 से वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और कार्यस्थल सुरक्षा संहिता लागू हो गई हैं। इनसे 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर मजदूरों और उद्योगों के लिए आधुनिक और सरल व्यवस्था बनाई गई।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025:
इस कानून का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और सामाजिक कल्याण को मजबूत करना है। हालांकि, कुछ मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया।

कर और जीएसटी सुधार:
आयकर अधिनियम 2025 को मंजूरी मिली, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसमें कोई नया टैक्स नहीं, बल्कि कानून की भाषा को सरल बनाया गया है। बजट में मध्यम वर्ग को राहत देते हुए सालाना 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई आयकर नहीं लगेगा।

कुल मिलाकर, 2025 में संसद ने कई ऐसे फैसले लिए, जो देश की अर्थव्यवस्था, शासन व्यवस्था और आम नागरिकों की जिंदगी पर लंबे समय तक असर डाल सकते हैं।

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