
पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोनिया गांधी से इन दस्तावेजों को प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) को वापस लौटाने की अपील की है।
मामला क्या है?
2008 में 51 बक्सों में लगभग 21 हजार दस्तावेज सोनिया गांधी को सौंपे गए थे। इनमें नेहरू के निजी पारिवारिक पत्र, नोट्स और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री शामिल थी। PMML ने इन दस्तावेजों की सुरक्षा और रिकॉर्ड रखने के लिए इन्हें सौंपा था, न कि उपहार के रूप में।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने बताया कि PMML ने कई बार इन दस्तावेजों की वापसी के लिए पत्र भेजे, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेहरू से जुड़े कोई दस्तावेज “लापता” नहीं हैं और यह सब राष्ट्र की दस्तावेजी विरासत का हिस्सा हैं।
इतिहासकारों और संस्थान की प्रतिक्रिया
PMML के सदस्य और इतिहासकार रिजवान कादरी ने कहा कि 2019 में जब वे संस्था से जुड़े, तो उन्होंने शोधकर्ताओं की सुविधा के लिए प्रयास किए। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी ने 2008 में इन कागजातों को अपनी कस्टडी में ले लिया था। 2024 की बैठक के बाद यह पहली बार स्वीकार किया गया कि सोनिया गांधी उस समय संस्था की अध्यक्ष थीं।
कादरी ने उम्मीद जताई कि सोनिया गांधी जल्द ही इन दस्तावेजों को स्वायत्त संस्था PMML को वापस कर देंगी।
आगे क्या होगा?
संसद और मंत्रालय लगातार इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला न केवल ऐतिहासिक दस्तावेजों की सुरक्षा का है, बल्कि देश की सांस्कृतिक और दस्तावेजी विरासत की सुरक्षा से भी जुड़ा है।