Thursday, January 15

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: छात्रसंघ चुनाव शिक्षा के अधिकार से ऊपर नहीं, याचिका खारिज

राजस्थान हाईकोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव पर लगी रोक हटाने की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक अधिकार हैं, लेकिन यह शिक्षा के अधिकार से ऊपर नहीं हो सकता। इसके साथ ही राज्य सरकार को छात्रसंघ चुनाव को लेकर नीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

This slideshow requires JavaScript.

याचिका खारिज, छात्र नेता खुश

छात्र नेताओं की याचिका खारिज होने के बावजूद छात्र नेता हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं। नीरज खीचड़ ने कहा कि सरकार को चुनावों के लिए नीति बनाने के निर्देश मिलने से उम्मीद है कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने छात्र नेताओं की भावनाओं को समझा और चुनावों के खिलाफ कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की।

चुनाव होंगे या नहीं, फिलहाल संशय

राजस्थान के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव कब होंगे, फिलहाल यह तय नहीं है। हाईकोर्ट ने चुनाव कराए जाने का स्पष्ट आदेश नहीं दिया, बल्कि इसे सरकार पर छोड़ दिया है। अब सरकार को तय करना होगा कि चुनाव कराए जाएं या नहीं, और यदि हों तो क्या वे लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार होंगे या किसी नई समिति की राय ली जाएगी।

पिछला इतिहास

करीब साढ़े तीन साल पहले अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में छात्रसंघ चुनावों पर रोक लगाई गई थी। उच्च शिक्षा विभाग ने चुनाव नहीं कराने का निर्णय लिया। तब से छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2006 में भी छात्रसंघ चुनावों पर रोक लगी थी, जिसे 2010 में हटाकर चुनाव फिर से शुरू किए गए थे।

राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार और शिक्षा के महत्व के बीच संतुलन का उदाहरण है। अब छात्रों और प्रशासन दोनों की निगाहें सरकार की आगामी नीति पर टिकी हैं।

Leave a Reply