
संसद के शीतकालीन सत्र के अनिश्चितकालीन समापन के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बुलाई गई बैठक में राजनीति का एक अलग ही रंग देखने को मिला। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच चाय पर हुई इस मुलाकात में न केवल खुलकर बातचीत हुई, बल्कि कई मौकों पर जोरदार ठहाके भी लगे।
इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई केंद्रीय मंत्री मौजूद थे। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने विपक्षी दलों का नेतृत्व किया।
सदन की तल्खी से अलग दिखा माहौल
स्पीकर के चैंबर में हुई इस बैठक का माहौल पूरी तरह खुशनुमा और सौहार्दपूर्ण रहा। हाल के दिनों में संसद के भीतर देखने को मिली तीखी बहसों और हंगामे के उलट, इस अनौपचारिक बैठक में राजनीतिक मतभेदों से परे संवाद और मुस्कान नजर आई।
खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रियंका गांधी खुद भी ठहाके लगाते दिखे, जो मौजूदा राजनीतिक माहौल में कम ही देखने को मिलता है।
हालांकि बैठक का औपचारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इसे संसदीय परंपराओं और आपसी संवाद को मजबूत करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
सत्र में कई अहम विधेयक हुए पारित
शीतकालीन सत्र के दौरान संसद ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर मुहर लगाई। इनमें
- मनरेगा की जगह लाया गया ‘विकसित भारत–जी राम जी’ बिल,
- परमाणु क्षेत्र से जुड़ा ‘SHANTI बिल 2025’,
- और बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को मंजूरी देने वाला विधेयक शामिल है।
विदेश से राहुल गांधी का तीखा विरोध
हालांकि सत्र समाप्ति के बाद संसद परिसर में सौहार्द दिखा, लेकिन ‘विकसित भारत–जी राम जी’ बिल को लेकर विपक्ष का विरोध जारी है। राहुल गांधी ने विदेश से सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मनरेगा के 20 वर्षों की विरासत को एक ही दिन में समाप्त कर दिया गया। उन्होंने इसे अधिकार-आधारित योजना के बजाय दिल्ली से नियंत्रित व्यवस्था करार दिया।
राजनीति में दुर्लभ तस्वीर
मतभेदों से भरी राजनीति के बीच यह बैठक इसलिए खास रही क्योंकि इसमें सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद, सौहार्द और ठहाकों की तस्वीर सामने आई—जो भारतीय राजनीति में अब कम ही देखने को मिलती है।