
दालें सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए पोषण का खजाना भी हैं। डॉक्टर सलीम जैदी के अनुसार, मसूर, मूंग और उड़द की दालें ओवरऑल न्यूट्रिशन के लिहाज से सबसे बेहतर मानी जाती हैं।
मसूर की दाल – खून बढ़ाने वाली दाल
मसूर की दाल में फैट कम, लेकिन प्रोटीन और जरूरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं। यह नया खून बनाने में मदद करती है और हल्की होने के कारण जल्दी पच जाती है।
किसे खानी चाहिए:
- खून की कमी वाले लोग
- हमेशा थकान महसूस करने वाले
- तेजी से वजन बढ़ने की समस्या वाले
100 ग्राम मसूर दाल में लगभग 24 ग्राम प्रोटीन, पर्याप्त आयरन, कैल्शियम और फॉस्फोरस होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
मूंग दाल – प्रोटीन का खजाना
हरी छिलके वाली और पीली मूंग दाल हल्की और सात्विक मानी जाती है। इसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में होता है।
किसे खानी चाहिए:
- डायबिटीज के मरीज
- हार्ट पेशेंट
- वजन घटाने वाले
मूंग दाल गैस, एसिडिटी कम करती है, लिवर को डिटॉक्स करती है और खराब कोलेस्ट्रॉल घटाने में मदद करती है।
उड़द की दाल – हड्डियों और जोड़ों को मजबूत बनाने वाली दाल
उड़द की दाल में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं। आयरन भी अच्छी मात्रा में होता है, जो कमजोरी दूर करता है। आयुर्वेद में इसे ताकत बढ़ाने वाली दाल माना गया है।
किसे खानी चाहिए:
- जोड़ों का दर्द और नसों की कमजोरी वाले
- शारीरिक कमजोरी वाले
कमजोर पाचन वाले लोग इसे सीमित मात्रा में या इडली-दोसा जैसे फर्मेंटेड रूप में खा सकते हैं।
दाल खाने का सही तरीका
- केवल एक ही दाल पर निर्भर न रहें।
- हफ्ते में दालों को बदल-बदल कर खाएं: कुछ दिन मसूर, कुछ दिन मूंग, कुछ दिन उड़द, और हफ्ते में एक बार कुलथी।
- दाल बनाते समय देसी घी, जीरा और हींग का तड़का लगाएँ। इससे स्वाद बढ़ता है और पोषक तत्व बेहतर अवशोषित होते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।