
नई दिल्ली। अक्सर नया मोबाइल चार्जर खरीदने के बावजूद फोन धीमे चार्ज होने लगता है या चार्जिंग में समस्या आती है। इसका मुख्य कारण नकली चार्जर हो सकता है। खासकर OPPO, Realme और OnePlus के सुपरवूक फास्ट चार्जर की नकली कॉपियां बाजार में खूब मिलती हैं। नकली चार्जर सस्ते जरूर होते हैं, लेकिन ये फोन की बैटरी को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कभी-कभी आग लगने का खतरा भी होता है।
1. QR कोड और सीरियल नंबर से पहचानें
असली चार्जर पर QR कोड और सीरियल नंबर लिखा होता है। QR कोड स्कैन करने पर 27 अंकों का नंबर दिखाई देता है। चार्जर पर लिखे 16 अंकों या अक्षरों वाले सीरियल नंबर से QR कोड का आखिरी 16 अंक मिलाना जरूरी है। अगर नंबर मैच नहीं करता, तो चार्जर नकली हो सकता है।
2. चार्जर की बनावट और फिनिशिंग देखें
असली चार्जर की बनावट स्मूथ और साफ होती है। किनारे चिकने होते हैं, कोई प्लास्टिक का अतिरिक्त टुकड़ा बाहर नहीं निकला होता। केबल मजबूत और साफ होती है। प्रिंटिंग भी स्पष्ट और सही होती है। नकली चार्जर में किनारे खुरदरे, प्रिंटिंग धुंधली या गलत स्पेलिंग वाली होती है।
3. चार्जिंग करते समय जांचें
चार्जर को फोन में लगाकर देखें कि क्या फ्लैश चार्ज एनिमेशन आता है या बैटरी आइकन पर फास्ट चार्जिंग का संकेत दिखता है। चार्जिंग स्पीड भी असली चार्जर तेज होती है। अगर चार्जर हिलने पर आवाज आती है या चार्जिंग धीमी है, तो यह नकली हो सकता है।
सावधानियां
- हमेशा अधिकृत स्टोर या भरोसेमंद जगह से ही चार्जर खरीदें।
- सस्ते चार्जर से बचें, क्योंकि ये बैटरी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- शक होने पर सर्विस सेंटर में दिखाएं।
इन आसान तरीकों से आप नकली चार्जर से बच सकते हैं और अपने फोन की बैटरी को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।