
झांसी।
झांसी के संत बेहटा गांव से सामने आई यह कहानी इंसानियत और जिम्मेदारी का उदाहरण है। सात साल की उम्र में माता-पिता दोनों खोने वाली शिवानी को ग्राम प्रधान नरेश यादव उर्फ बब्बा ने अपनी बेटी की तरह अपनाया और पालन-पोषण किया। सालों तक उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि बच्ची कभी बेसहारा महसूस न करे और उसके जीवन में शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान की कमी न रहे।
बेसहारा बच्ची की कहानी:
शिवानी के पिता हार्ट अटैक से और मां बीमारी के कारण असमय चल बसे। मासूम उम्र में माता-पिता खोने के बाद उसकी और उसकी छोटी बहन की जिम्मेदारी उठाने को कोई आगे नहीं आया। ऐसे कठिन समय में ग्राम प्रधान ने शिवानी को गोद लिया और उसकी छोटी बहन को मामा के पास भेजा।
नरेश बब्बा ने न केवल शिवानी को अपने घर में स्थान दिया, बल्कि अपने दिल में भी उसे अपनाया। स्कूल से लेकर सामाजिक कार्यक्रमों तक हर मोड़ पर वह उसके साथ खड़े रहे। उन्होंने शिवानी की शिक्षा और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में हर संभव प्रयास किया। वर्तमान में शिवानी चिरगांव के चंदन सिंह महाविद्यालय से बीएड की पढ़ाई कर रही है।
मान-सम्मान के साथ शादी:
समय आने पर ग्राम प्रधान ने शिवानी के लिए रिश्ता तलाशा। अंततः शिवानी की शादी मध्य प्रदेश की पूर्व कैबिनेट मंत्री इमरती देवी के भतीजे से तय हुई। 14 दिसंबर को यह विवाह समारोह बड़े ही धूमधाम और शाही अंदाज में संपन्न हुआ। शादी में गांव के गणमान्य लोग, रिश्तेदार और क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समाज में प्रेरणा का स्रोत:
शिवानी की यह शादी केवल परिवार तक सीमित नहीं रही। आसपास के इलाकों में भी ग्राम प्रधान की इस इंसानियत की मिसाल की चर्चा हो रही है। लोग नरेश बब्बा की जमकर सराहना कर रहे हैं और इसे समाज के लिए आदर्श मान रहे हैं। बुजुर्ग कहते हैं कि आज के समय में जब लोग अपने सगे रिश्तों से भी मुंह मोड़ लेते हैं, ऐसे में किसी बेसहारा बच्ची को अपनाकर उसकी पूरी जिंदगी संवारना वास्तव में महान कार्य है।
परिवार की खुशी:
शिवानी के चाचा शिशुपाल और बुआ राजकुमारी ने बताया कि नरेश बब्बा ने जो वादा किया, उसे पूरी तरह निभाया। आज शिवानी को सम्मान और प्यार भरे घर में विदा किया गया है। यह घटना न केवल झांसी, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा और मिसाल बन गई है।