बांस का पुल और 400 रुपये का सफर खगड़िया के अलौली में आज भी ‘आदिम युग’ जैसी चुनौतियां, 50 हजार आबादी संकट में
खगड़िया।
आजादी के सात दशक बाद भी बिहार के खगड़िया जिले का अलौली प्रखंड विकास की बुनियादी कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया है। बागमती नदी पर एक स्थायी पुल के अभाव में दियारा क्षेत्र के 10 से अधिक गांवों की करीब 50 हजार आबादी आज भी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर है। मोहरा घाट, कोलवारा, शहरबन्नी समेत कई गांवों के लोगों के लिए नदी पार करना रोजमर्रा की मजबूरी है, जहां नाव और बांस से बने अस्थायी चचरी पुल ही जीवनरेखा बने हुए हैं।
बरसात के दिनों में जब बागमती उफान पर होती है, तब यह सफर और भी भयावह हो जाता है। तेज धार, ओवरलोड नावें और जर्जर चचरी पुल हर पल हादसे को न्योता देते हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
नदी पार करना जानलेवा ही नहीं, महंगा भी
पुल के अभाव ने ग्रामीणों की जेब पर भी भारी बोझ डाल दिया है। निजी नाव संचालक नदी पार कराने के नाम पर मनमाना किराया वसूलते है...










