Wednesday, March 4

Bihar

बांस का पुल और 400 रुपये का सफर खगड़िया के अलौली में आज भी ‘आदिम युग’ जैसी चुनौतियां, 50 हजार आबादी संकट में
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बांस का पुल और 400 रुपये का सफर खगड़िया के अलौली में आज भी ‘आदिम युग’ जैसी चुनौतियां, 50 हजार आबादी संकट में

खगड़िया। आजादी के सात दशक बाद भी बिहार के खगड़िया जिले का अलौली प्रखंड विकास की बुनियादी कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया है। बागमती नदी पर एक स्थायी पुल के अभाव में दियारा क्षेत्र के 10 से अधिक गांवों की करीब 50 हजार आबादी आज भी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर है। मोहरा घाट, कोलवारा, शहरबन्नी समेत कई गांवों के लोगों के लिए नदी पार करना रोजमर्रा की मजबूरी है, जहां नाव और बांस से बने अस्थायी चचरी पुल ही जीवनरेखा बने हुए हैं। बरसात के दिनों में जब बागमती उफान पर होती है, तब यह सफर और भी भयावह हो जाता है। तेज धार, ओवरलोड नावें और जर्जर चचरी पुल हर पल हादसे को न्योता देते हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। नदी पार करना जानलेवा ही नहीं, महंगा भी पुल के अभाव ने ग्रामीणों की जेब पर भी भारी बोझ डाल दिया है। निजी नाव संचालक नदी पार कराने के नाम पर मनमाना किराया वसूलते है...
कार की पिछली सीट बना ‘न्याय का मंदिर’ मधुबनी की अनीता झा 13 वर्षों से दे रही हैं संघर्ष, स्वाभिमान और संकल्प की मिसाल
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कार की पिछली सीट बना ‘न्याय का मंदिर’ मधुबनी की अनीता झा 13 वर्षों से दे रही हैं संघर्ष, स्वाभिमान और संकल्प की मिसाल

मधुबनी। जहां सुविधाओं के अभाव में कई लोग अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं, वहीं बिहार के मधुबनी की वरिष्ठ अधिवक्ता अनीता झा ने अभाव को ही अपनी ताकत बना लिया। पिछले 13 वर्षों से वह जिला अदालत परिसर में खड़ी अपनी कार की पिछली सीट को ही चैंबर बनाकर वकालत कर रही हैं। यह कार आज सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि उनके लिए न्याय का मंदिर बन चुकी है। मधुबनी जिला अदालत के परिसर में हर सुबह करीब 10:30 बजे एक सफेद कार आकर अपनी तय जगह पर खड़ी होती है। दिनभर वहीं बैठकर 57 वर्षीय अनीता झा अपने मुवक्किलों से मिलती हैं, मामलों की सुनवाई की तैयारी करती हैं, कानूनी सलाह देती हैं और दस्तावेज तैयार करती हैं। कड़ाके की ठंड हो या भीषण गर्मी, सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उनकी यही कार उनका कार्यालय रहती है। मजबूरी को बनाया अवसर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू करने के बाद जब अनीता झा को चैंबर आवंटित नहीं हो सका, तो ...
बिहार में ‘ऑपरेशन कांग्रेस’ की सरगर्मी, पर नीतीश कुमार बने सबसे बड़ा ट्विस्ट छह विधायकों के दलबदल पर क्यों हिचक रहे हैं मुख्यमंत्री?
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बिहार में ‘ऑपरेशन कांग्रेस’ की सरगर्मी, पर नीतीश कुमार बने सबसे बड़ा ट्विस्ट छह विधायकों के दलबदल पर क्यों हिचक रहे हैं मुख्यमंत्री?

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर दलबदल की आहट तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि इस संभावित ‘ऑपरेशन कांग्रेस’ में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बन गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक मुख्यमंत्री की हरी झंडी नहीं मिल पाई है। दरअसल, चुनाव परिणाम आने के बाद से ही कांग्रेस विधायकों के टूटने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उस समय मामला चर्चाओं तक ही सीमित रह गया था, लेकिन अब हालात कुछ अलग बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस बार कांग्रेस विधायकों के साथ जदयू नेताओं की बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और विधायकों में भी स्पष्ट रुचि देखी जा रही है। कांग्रेस विधायकों की बढ़ी सक्रियता कांग्रेस विधायकों के करीबी सूत्रों के अनुसार, पार्टी के छह विधायक—अभिषेक...
बिहार में ‘समृद्धि’ की लहर सीतामढ़ी–शिवहर को 600 करोड़ से अधिक की सौगात, आज विकास योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
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बिहार में ‘समृद्धि’ की लहर सीतामढ़ी–शिवहर को 600 करोड़ से अधिक की सौगात, आज विकास योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

सीतामढ़ी/शिवहर। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी महत्वाकांक्षी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत सोमवार को सीतामढ़ी और शिवहर जिलों का दौरा करेंगे। इस दौरान वे दोनों जिलों को 600 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं की सौगात देंगे। यात्रा का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देना और जनसंवाद के माध्यम से जमीनी हकीकत से रू-ब-रू होना है। मुख्यमंत्री इस दौरे के दौरान न केवल विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे, बल्कि अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर विकास कार्यों की प्रगति का भी जायजा लेंगे। साथ ही आम जनता से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे। विकास रोडमैप की दृष्टि से इस यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है। सीतामढ़ी को 554 करोड़ से अधिक की सौगात सीतामढ़ी जिले के विकास को नई रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री 554 करो...
अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश 12 अपहृत बच्चे सकुशल बरामद, 13 गिरफ्तार; कई राज्यों में फैला था नेटवर्क
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अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश 12 अपहृत बच्चे सकुशल बरामद, 13 गिरफ्तार; कई राज्यों में फैला था नेटवर्क

रांची। झारखंड पुलिस ने बच्चों की तस्करी और अपहरण से जुड़े एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर बड़ी सफलता हासिल की है। विशेष जांच टीम (एसआईटी) की कार्रवाई में अब तक इस गिरोह के 13 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 12 अपहृत बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह झारखंड के साथ-साथ बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सक्रिय था और लंबे समय से बच्चों की तस्करी, भीख मंगवाने व अन्य आपराधिक गतिविधियों में लिप्त था। ‘गुलगुलिया गैंग’ के नेटवर्क का खुलासा रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने रविवार को प्रेस वार्ता में बताया कि इस गिरोह का पर्दाफाश धुर्वा थाना क्षेत्र से दो मासूम बच्चों—अंश और अंशिका—के अपहरण के बाद हुई जांच के दौरान हुआ। बच्चों के लापता होने के बाद रांची पुलिस ने जिले के साथ-साथ अन्य जिलों और राज्यों में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया, जिसके दौर...
बिहार में विकास की रफ्तार तेज करने की नई व्यवस्था मंत्रियों के बाद अब अफसरों को भी जिलों का प्रभार, सम्राट चौधरी के साथ पटना संभालेंगे बी. राजेंदर
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बिहार में विकास की रफ्तार तेज करने की नई व्यवस्था मंत्रियों के बाद अब अफसरों को भी जिलों का प्रभार, सम्राट चौधरी के साथ पटना संभालेंगे बी. राजेंदर

पटना। बिहार सरकार ने राज्य में विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंपने के बाद अब सरकार ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भी जिलों की जिम्मेदारी दे दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है, ताकि योजनाओं की निगरानी और विभागीय समन्वय में किसी तरह की कमी न रह जाए। मंत्रियों और अफसरों को मिला संयुक्त दायित्व मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष सह प्रभारी मंत्री के मनोनयन से जुड़ी पूर्व की सभी अधिसूचनाओं को निरस्त करते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है। अगले आदेश तक मंत्रियों को उनके नाम के सामने अंकित जिलों का प्रभारी मंत्री सह अध्यक्ष नामित...
JDU में आरसीपी सिंह की नो एंट्री, ललन सिंह ने साफ किया रुख पुराने जख्मों को कुरेदते हुए बताया—क्यों बंद हैं पार्टी के दरवाजे
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JDU में आरसीपी सिंह की नो एंट्री, ललन सिंह ने साफ किया रुख पुराने जख्मों को कुरेदते हुए बताया—क्यों बंद हैं पार्टी के दरवाजे

पटना। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जनता दल (यूनाइटेड) में संभावित वापसी की अटकलों पर अब पूर्ण विराम लग गया है। जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में कहा है कि पार्टी में आरसीपी सिंह के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने आरसीपी सिंह पर पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाते हुए पुराने विवादों को फिर से उजागर किया। आरसीपी की वापसी पर ललन का ब्रेक बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे आरसीपी सिंह जदयू में ‘घर वापसी’ कर सकते हैं। लेकिन इन अटकलों को खारिज करते हुए ललन सिंह ने कहा, “जिन लोगों के कार्यकाल में पार्टी 70 से ज्यादा सीटों से सिमटकर 40 के आसपास पहुंच गई, उनके लिए अब पार्टी में कोई जगह नहीं है। जनता ने एक बार फिर मुख्यमंत्री ...
पटना में NEET छात्रा की मौत से हड़कंप: शंभू गर्ल्स हॉस्टल का मालिक मनीष रंजन गिरफ्तार, 5 साल में चपरासी से करोड़पति बनने का रहस्य जांच के घेरे में
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पटना में NEET छात्रा की मौत से हड़कंप: शंभू गर्ल्स हॉस्टल का मालिक मनीष रंजन गिरफ्तार, 5 साल में चपरासी से करोड़पति बनने का रहस्य जांच के घेरे में

पटना। बिहार की राजधानी पटना में NEET की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस सनसनीखेज मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन उर्फ मनीष चंद्रवंशी की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और मनीष की संपत्ति, आय के स्रोतों और आपराधिक पृष्ठभूमि को खंगाला जा रहा है। 15 हजार की नौकरी से करोड़ों की संपत्ति तक मनीष चंद्रवंशी मूल रूप से जहानाबाद जिले का निवासी है। वर्ष 2020 में वह पटना आया और एक निजी अस्पताल में फोर्थ ग्रेड कर्मचारी के रूप में मात्र 15 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम करने लगा। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान उसने ऑक्सीजन सप्लाई एजेंसी शुरू की, जिसके बाद उसकी आर्थिक स्थिति में अचानक और असामान्य वृद्धि देखी गई। पुलिस जांच में सामने आया है कि आज प...
तेजस्वी यादव की ‘समीक्षा बैठक’ पर सवाल, विधायक नदारद—तो फिर मकसद क्या था?
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तेजस्वी यादव की ‘समीक्षा बैठक’ पर सवाल, विधायक नदारद—तो फिर मकसद क्या था?

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी हार के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने समीक्षा बैठक तो की, लेकिन यह बैठक समाधान से ज़्यादा सवाल छोड़ गई। राजनीतिक गलियारों में जहां इस बैठक से जवाबदेही तय होने और भीतरघातियों पर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही थी, वहीं हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखी।   सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि खुद को ‘समीक्षात्मक’ बताने वाली इस बैठक में पार्टी के एक भी विधायक शामिल नहीं थे। जबकि एनडीए के नेता लगातार यह दावा कर रहे हैं कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 18 विधायक उनके संपर्क में हैं। ऐसे समय में विधायकों से दूरी ने तेजस्वी यादव की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।   विधायकों के बिना समीक्षा?   राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बैठक का उद्देश्य चुनावी हार की समीक्षा था, तो सबसे अहम भूमिका निभाने वाले विधायकों को बाहर रखना समझ से...
बिहार: फार्मासिस्ट के पद पर सिर्फ डी फार्मा वाले ही बहाल होंगे, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा
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बिहार: फार्मासिस्ट के पद पर सिर्फ डी फार्मा वाले ही बहाल होंगे, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा

    पटना: बिहार में फार्मासिस्टों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता का विवाद अब खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में फार्मासिस्ट के पद पर केवल डी फार्मा (डिप्लोमा इन फार्मेसी) धारक ही नियुक्त हो सकते हैं। पटना हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल 2025 को यह फैसला सुनाया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।   केस का विवरण यह मामला बिहार में फार्मासिस्टों के 2,473 पदों पर नियमित नियुक्तियों से जुड़ा है। बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने इन पदों के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया था, जिसमें अभ्यर्थी के लिए न्यूनतम योग्यता विज्ञान में इंटरमीडिएट पास और किसी मान्यता प्राप्त फार्मेसी संस्थान से डी फार्मा डिप्लोमा होना अनिवार्य बताया गया था। इसके अलावा अभ्यर्थी का बिहार फार्मेसी काउंसिल में पंजीकृत होना भी जरूरी है।   बी फार्मा और एम फार्मा धारकों की निराशा सुप्रीम...