Saturday, January 17

बिहार: फार्मासिस्ट के पद पर सिर्फ डी फार्मा वाले ही बहाल होंगे, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा

 

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पटना: बिहार में फार्मासिस्टों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता का विवाद अब खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में फार्मासिस्ट के पद पर केवल डी फार्मा (डिप्लोमा इन फार्मेसी) धारक ही नियुक्त हो सकते हैं। पटना हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल 2025 को यह फैसला सुनाया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।

 

केस का विवरण

यह मामला बिहार में फार्मासिस्टों के 2,473 पदों पर नियमित नियुक्तियों से जुड़ा है। बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने इन पदों के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया था, जिसमें अभ्यर्थी के लिए न्यूनतम योग्यता विज्ञान में इंटरमीडिएट पास और किसी मान्यता प्राप्त फार्मेसी संस्थान से डी फार्मा डिप्लोमा होना अनिवार्य बताया गया था। इसके अलावा अभ्यर्थी का बिहार फार्मेसी काउंसिल में पंजीकृत होना भी जरूरी है।

 

बी फार्मा और एम फार्मा धारकों की निराशा

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बी फार्मा और एम फार्मा डिग्रीधारी फार्मासिस्ट के पद के लिए योग्य नहीं हैं। वे केवल अन्य उच्च पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, जिन अभ्यर्थियों ने डी फार्मा के बाद बी या एम फार्मा की डिग्री ली है, उन्हें इस पद के लिए योग्य माना जाएगा।

 

व्यवहारिक प्रशिक्षण पर जोर

कोर्ट ने कहा कि डी फार्मा पाठ्यक्रम में 500 घंटे का व्यवहारिक प्रशिक्षण अनिवार्य है, जिसमें से 250 घंटे प्रिस्क्रिप्शन वितरण के लिए तय हैं। बी फार्मा पाठ्यक्रम में 150 घंटे का प्रशिक्षण होता है, जो उन्हें अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या फार्मास्युटिकल उद्योगों में प्रशिक्षण लेने तक सीमित करता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिप्लोमा धारकों के पास डिग्रीधारकों की तुलना में रोजगार के अवसर सीमित होने के बावजूद राज्य द्वारा उन्हें न्यूनतम योग्यता बनाना उचित है।

 

बिहार सरकार का फैसला सही ठहराया

इस नियुक्ति प्रक्रिया में 75 अंकों की परीक्षा और 25 अंक अनुभव के लिए तय किए गए थे। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के नियमों को सही ठहराया था। इसके खिलाफ दायर सभी एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

 

निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से डी फार्मा धारक अभ्यर्थी उत्साहित हैं, जबकि बी फार्मा और एम फार्मा डिग्रीधारी इस फैसले से निराश हैं। अब फार्मासिस्ट के पद के लिए केवल डी फार्मा धारकों की ही नियुक्ति संभव है।

 

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