15 घंटे की मेहनत, 112 किलोमीटर की दौड़ और जेब में सिर्फ 763 रुपये गिग इकोनॉमी का कड़वा सच, संसद तक पहुंची आवाज
नई दिल्ली।देश में तेजी से बढ़ती ‘गिग इकोनॉमी’ के चमकदार दावों के पीछे छिपा कड़वा सच अब सामने आने लगा है। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स के शोषण को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने एक डिलीवरी एजेंट का उदाहरण साझा करते हुए बताया कि कैसे 15 घंटे की कड़ी मेहनत और दिनभर की दौड़ के बाद भी एक वर्कर को महज 762 रुपये की कमाई होती है।
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “यह गिग इकोनॉमी की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि ऐप्स और एल्गोरिदम के पीछे छिपा हुआ प्रणालीगत शोषण है।” उन्होंने कहा कि भारत कम वेतन, अत्यधिक काम के बोझ और असुरक्षित रोजगार के सहारे डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण नहीं कर सकता।
15 घंटे काम, प्रति घंटा कमाई सिर्फ 52 रुपयेसांसद द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट के अनुसार, ब्लिंकिट के एक डिलीवरी एजेंट ने 14 घंटे 39 मिनट तक काम कर 28 ऑर्ड...










