
नई दिल्ली। एआई इंडिया समिट 2026 में विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि भारत को अपने IT सेक्टर और AI एप्लिकेशन को मजबूत बनाने के लिए अपना स्वयं का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल तैयार करना होगा। मौजूदा समय में भारत के AI एप्लिकेशन अमेरिका और चीन के प्लेटफॉर्म पर बनाए जा सकते हैं, लेकिन रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भारत का अपना AI मॉडल होना जरूरी है।
छोटे और बड़े AI मॉडल
-
छोटे मॉडल: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में छोटे AI मॉडल बनाने की सलाह दी गई है। ये कम पैरामीटर वाले मॉडल विशेष कामों के लिए बनाए जा सकते हैं और इनके लिए बड़े डेटा सेंटर की जरूरत नहीं होती।
-
बड़े मॉडल: Google और OpenAI जैसे वैश्विक कंपनियों के मॉडल ट्रिलियन से अधिक पैरामीटर पर चलते हैं और दुनिया भर के डेटा से प्रशिक्षित होते हैं।
भारत में डेटा की विशालता
भारत दुनिया में सबसे अधिक डेटा उत्पन्न करने वाला देश है। इसके लिए देश को अपने डेटा सेंटर बनाने होंगे ताकि भारतीय नागरिकों का डेटा सुरक्षित रहे। बड़े डेटा सेंटर विदेशी डेटा से भर जाने पर भारतीय डेटा के लिए जगह कम रह जाएगी।
बिजली और पर्यावरण की चुनौती
-
बड़े डेटा सेंटर को चलाने के लिए हजारों मेगावाट बिजली चाहिए।
-
रिन्यूएबल ऊर्जा जैसे सौर और पवन का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह हर समय उपलब्ध नहीं होती।
-
थर्मल पावर से ऊर्जा पैदा करने पर प्रदूषण बढ़ सकता है। इसलिए केवल आवश्यक डेटा सेंटर ही बनाए जाएं।
चिप्स और तकनीकी स्वतंत्रता
-
AI डिवेलपमेंट के लिए गणित में मजबूत पकड़ जरूरी है, खासकर लिनियर अलजेब्रा, कैलकुलस और प्रॉबेबिलिटी।
-
अत्याधुनिक चिप्स की कमी सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि केवल कुछ कंपनियां ही इनको डिजाइन और विकसित करती हैं।
-
विदेशी कंपनियों को भारत में चिप बनाने के लिए अरबों की सब्सिडी दी जा रही है, लेकिन अधिकांश लो-एंड चिप्स ही बन रही हैं।
भारत के लिए रणनीति
-
भारत को उन्नत लिथोग्राफी मशीनों सहित चिप बनाने की पूरी इकोसिस्टम तैयार करनी होगी।
-
प्रत्येक पार्ट के लिए 5-5 स्टार्टअप्स को फंड दिया जाए, ताकि उनमें से कम से कम दो सफल हों।
-
विदेशी कंपनियों को दी जा रही राशि को भारत में घरेलू चिप और AI मॉडल बनाने में निवेश किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की तरह भारत भी अपनी तकनीकी स्वतंत्रता सुनिश्चित कर सकता है और विदेशी निर्भरता कम कर सकता है। देश का अपना AI मॉडल बनाने से डेटा सुरक्षा, रणनीतिक मजबूती और तकनीकी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित होगी।
