
काशी। उत्तराम्नाय बदरी पीठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwarananda Saraswati ने नेशनल ब्रॉडकास्टिंग टाइम्स के लिए विशेष इंटरव्यू में देश की वर्तमान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि आज भारत में “राजनीति नहीं, पॉलिटिक्स चल रही है। राजनीति का मतलब राजा की नीति होती थी, लेकिन अब राज नहीं रहा और विदेश से आया पॉलिटिक्स यहां हावी हो गया है।”
नेतृत्व और प्रतिकार
शंकराचार्य ने बताया कि धर्म शास्त्र में कहा गया है कि मनमाने और निरंकुश कार्यों पर रोक लगाना जरूरी है। यदि नेतृत्व अनियंत्रित हो जाए तो उसका प्रतिकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा,
“अन्याय करने वालों को अपने शब्दों के जरिए रोका जाना चाहिए। मनमानेपन से सफलता नहीं मिलती, इसलिए नियंत्रण जरूरी है।”
पुराणों का महत्व और काशी में स्थिति
शंकराचार्य ने पुराणों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पुराण केवल पुराने कथाओं का संग्रह नहीं, बल्कि नए निर्माण और स्मृति का मार्गदर्शन हैं। काशी में जो मंदिर, विग्रह या घाट आधुनिकता के नाम पर बदले जा रहे हैं, वे सब पुराणों के माध्यम से अपने स्थान पर पुनः स्थापित होंगे।
उन्होंने कहा कि महर्षि व्यास ने पुराणों के जरिए भारत का भविष्य लिखा और समय के साथ पुनर्निर्माण होना आवश्यक है।
संतों और मठों की परंपरा
शंकराचार्य ने देश में संतों और मठों की परंपराओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि संत को सरकार से वेतन मिलने की आवश्यकता नहीं, संत का जीवन भगवान पर भरोसे चलता है। साथ ही उन्होंने फिल्म उद्योग में पंडितों के गलत चित्रण की आलोचना की और स्पष्ट किया कि पंडित केवल विद्वान होते हैं, न कि केवल ब्राह्मण।
गोहत्या रोकने की पहल
गोहत्या रोकने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को 40 दिन की मोहलत दी है। उनका उद्देश्य गो माता को राष्ट्रमाता के रूप में मान्यता दिलाकर गोवंश का संरक्षण करना है। मोहलत खत्म होने के बाद अगले कदम पर निर्णय लिया जाएगा।
शंकराचार्य ने कहा कि संस्कृति, धर्म और परंपरा के संरक्षण के लिए संयम और स्पष्ट दिशा दोनों जरूरी हैं। उनका यह दृष्टिकोण आधुनिक भारत में धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारियों की गंभीरता को रेखांकित करता है।
