
लखनऊ, 19 फरवरी 2026: आज छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती है। यह वह वीर मराठा योद्धा थे जिन्होंने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना कर इतिहास रच दिया। सैकड़ों युद्धों में अपनी रणनीति और वीरता का लोहा मनवाने वाले शिवाजी महाराज ने मुगलों को कई बार परास्त किया और अपने शासनकाल में 200 से अधिक किलों पर कब्जा किया।
बचपन से ही अद्भुत वीरता और नीति
शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी किला में हुआ। उनके पिता शाहाजी भोंसले और माता जीजीबाई ने उन्हें छोटी उम्र से ही साहस, जिम्मेदारी और नीति का पाठ पढ़ाया। जीजीबाई ने महाभारत और रामायण की कथाओं के माध्यम से शिवाजी को वीरता और नेतृत्व का ज्ञान दिया। आगे चलकर गुरु दादोजी कोंडदेव ने उन्हें तलवारबाजी, घुड़सवारी और युद्धकला की शिक्षा दी।
15 साल की उम्र में पहला विजय किला
शिवाजी महाराज केवल 15 साल के थे जब उन्होंने 1645 में तोरणा किले पर कब्जा कर अपना पहला ऐतिहासिक विजय हासिल की। इसके बाद उन्होंने लगातार किलों और क्षेत्रों पर अधिकार जमाया, और अपनी छापामार युद्धनीति (गनिमी कावा) के दम पर दुश्मनों को परास्त किया।
‘छत्रपति’ की उपाधि और मराठा साम्राज्य
6 जून 1674 को रायगढ़ किला में उनका राज्याभिषेक हुआ और उन्हें ‘छत्रपति’ की उपाधि मिली। इसी दिन को मराठा साम्राज्य की स्थापना के रूप में देखा जाता है।
प्रमुख किले और युद्ध
शिवाजी ने जीवनकाल में 200 से अधिक किले जीते। इनमें से 12 किले 2025 में यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल हुए। प्रमुख किलों में रायगढ़, राजगढ़, शिवनेरी, तोरणा, सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग, प्रतापगढ़, लोहागढ़, साल्हेर, पन्हाला, जिंजी (तमिलनाडु) और खांदेरी दुर्ग शामिल हैं।
शिवाजी महाराज ने सैकड़ों युद्ध लड़े, जिनमें प्रमुख हैं:
प्रतापगढ़ का युद्ध (1659): आदिलशाही के अफजल खान को परास्त किया।
सूरत पर धावा (1664): मुगलों के खिलाफ सफल हमला।
पुरंदर का युद्ध (1665): स्वराज्य बचाने के लिए आत्मसमर्पण किया।
सिंहगढ़ का युद्ध (1670): तानाजी मलुसरे की अगुआई में मुगलों पर विजय।
फादर ऑफ इंडियन नेवी
शिवाजी महाराज ने केवल भूमि ही नहीं, बल्कि समुद्र पर भी अपने अधिकार स्थापित किए। उन्होंने मराठा नौसेना की नींव रखी और कोंकण तट पर 100 किमी के क्षेत्र पर नियंत्रण किया। इस वजह से उन्हें भारतीय नौसेना का पिता (Father of Indian Navy) कहा जाता है।
नारा और आदर्श
शिवाजी का प्रमुख नारा था ‘हर हर महादेव’ और उनके समर्थक कहते थे ‘जय भवानी, जय शिवाजी’। उनका सपना था हिंदवी स्वराज्य स्थापित करना, जहां भारतीय संस्कृति और स्वराज्य की रक्षा हो।
अंतिम दिन
शिवाजी महाराज का देहांत 3 अप्रैल 1680 को रायगढ़ किले में हुआ। उनके बाद उनके पुत्र सांभाजी को मराठा सिंहासन मिला।
जयंती पर Maharashtra में उत्सव
आज महाराष्ट्र में शिवाजी जयंती के अवसर पर परेड, रैलियां, नाटक, शिव कथा और ऐतिहासिक हथियारों की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। शिवनेरी, रायगढ़ और सिंहगढ़ किलों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता, दूरदर्शिता और नीति आज भी भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
